
देहरादून
राजधानी की कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच शहर को नया पुलिस कप्तान मिल चुका है — प्रमेन्द्र सिंह डोबाल। पदभार संभालते ही उनकी कार्यशैली और शुरुआती सख्ती ने पुलिस महकमे से लेकर आम जनता तक एक चर्चा तेज कर दी है — क्या देहरादून में फिर लागू होगा “इंस्पेक्टर राज”?
क्यों जरूरी माना जा रहा कड़ा मॉडल
पिछले कुछ समय में चोरी, झपटमारी, नशा तस्करी और देर रात हुड़दंग जैसी घटनाओं ने राजधानी की शांत छवि को प्रभावित किया। कई इलाकों में पुलिस की मौजूदगी कम होने की शिकायतें भी सामने आईं। इसी पृष्ठभूमि में नए एसएसपी की तैनाती को प्रशासन की “संदेशात्मक कार्रवाई” माना जा रहा है।
क्या होता है “इंस्पेक्टर राज”
पुलिसिंग का वह मॉडल जिसमें पूरा नियंत्रण थाना स्तर पर मजबूत किया जाता है —
• हर क्षेत्र में तय गश्त
• हिस्ट्रीशीटर और संदिग्धों की निगरानी
• होटल-मकान किरायेदार सत्यापन
• देर रात चेकिंग अभियान
• बाजार और भीड़भाड़ वाले इलाकों में नियमित पुलिस मौजूदगी
यानी जिम्मेदारी सीधे थाना प्रभारी पर तय लापरवाही पर तुरंत कार्रवाई।
कप्तान की प्राथमिकताएँ क्या संकेत दे रही
पद संभालते ही एसएसपी ने
• धरना-प्रदर्शन मार्गों का निरीक्षण
• सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा
• पुलिस कर्मियों को फील्ड एक्टिव रहने के निर्देश
देकर साफ कर दिया कि आने वाले दिनों में कागजी नहीं, जमीनी पुलिसिंग दिखेगी।
अब नजर फैसले पर
राजधानी में चर्चा है —
अगर थाना-स्तर जवाबदेही तय हुई तो अपराध पर लगाम लगेगी,
और वही होगा असली “इंस्पेक्टर राज”।
अब देखना होगा कि नए कप्तान प्रमेन्द्र सिंह डोबाल इसे औपचारिक रूप देते हैं या नहीं — लेकिन शहर को सख्त पुलिसिंग का इंतजार जरूर है।



