
देहरादून
राजधानी देहरादून में मौसम के लगातार बदलते मिजाज का असर अब लोगों की सेहत पर भी दिखने लगा है। अस्पतालों में सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस समय ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण (URTI) और निचले श्वसन तंत्र संक्रमण (LRTI) के मामले ज्यादा सामने आते हैं।
दून अस्पताल के मेडिसिन विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉ. मोहम्मद आमिर खान ने बताया कि मौसम में अचानक ठंड-गर्मी का बदलाव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है, जिससे वायरस और बैक्टीरिया आसानी से शरीर पर हमला कर देते हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी सर्दी-जुकाम से लेकर ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसी गंभीर समस्या का कारण बन सकती है।
ये लक्षण दिखें तो सतर्क हो जाएं
डॉ. आमिर खान के अनुसार ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण में नाक बहना, छींक आना, गले में खराश और हल्का बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। वहीं निचले श्वसन तंत्र संक्रमण में खांसी, बलगम, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द और तेज बुखार की समस्या हो सकती है।
रोजमर्रा की सावधानियां रखें
उन्होंने बताया कि बदलते मौसम में कुछ आसान सावधानियां अपनाकर संक्रमण से बचा जा सकता है।
• मौसम के अनुसार कपड़े पहनें और ठंडी हवा से बचें
• हाथों की सफाई का विशेष ध्यान रखें
• भीड़भाड़ और संक्रमित लोगों से दूरी बनाए रखें
• गुनगुना पानी और तरल पदार्थ का सेवन करें
• पौष्टिक भोजन और पर्याप्त नींद लें
• धूल, धुएं और प्रदूषण से बचें
• नियमित व्यायाम और प्राणायाम करें
हल्के लक्षण में घरेलू उपाय कारगर
उन्होंने बताया कि हल्के लक्षण होने पर भाप लेना, नमक वाले गुनगुने पानी से गरारे करना, अदरक-शहद का सेवन और हल्दी वाला दूध पीना राहत दे सकता है।
डॉक्टर की सलाह से ही लें दवाएं
डॉ. आमिर खान ने कहा कि बुखार में पैरासिटामोल, एलर्जी या सर्दी में सेटिरिजिन जैसी दवाएं ली जा सकती हैं, लेकिन एंटीबायोटिक दवाएं जैसे एमोक्सिसिलिन केवल डॉक्टर की सलाह से ही लेनी चाहिए।
इन स्थितियों में तुरंत अस्पताल जाएं
अगर तेज बुखार तीन दिन से ज्यादा रहे, सांस लेने में तकलीफ हो, खांसी में खून आए या मरीज बुजुर्ग, बच्चा या अस्थमा और COPD से पीड़ित हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।
डॉ. आमिर खान ने कहा कि बदलते मौसम में लापरवाही न बरतें और समय पर इलाज कराकर खुद को और परिवार को संक्रमण से सुरक्षित रखें।


