कार्बेट में वन अपराध पर सख्ती, हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद तीनों ने किया सरेंडर

रामनगर: कार्बेट टाइगर रिजर्व के बिजरानी वन क्षेत्र में सागौन के पेड़ों के अवैध पातन के मामले में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। लंबे समय से फरार चल रहे तीन आरोपियों ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद रामनगर न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। न्यायालय ने तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक राहुल मिश्रा के अनुसार, 28 मार्च 2025 को बिजरानी वन क्षेत्र के फूलताल ब्लॉक, आमडंडा पुरानी बीट की नई प्रस्तावित बीट के कक्ष संख्या-03 में राष्ट्रीय राजमार्ग-309 के पास सागौन के पेड़ों के अवैध कटान का मामला सामने आया था। इस संबंध में बिजरानी रेंज में वन अपराध संख्या 06/बिजरानी/2024-25 दर्ज किया गया था।
मामले की जांच के दौरान फरहाद खां, सुलेमान, समीर, सलमान, उमेर खान, युनुस और यासीन की संलिप्तता सामने आई। फरहाद खां को 28 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका था, जबकि अन्य आरोपी फरार चल रहे थे। जांच में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किए जाने के बावजूद आरोपियों ने सहयोग नहीं किया, जिसके बाद न्यायालय से गैर-जमानती वारंट जारी कराए गए।
सुलेमान को भी किया जा चुका है गिरफ्तार
गैर-जमानती वारंट की कार्रवाई के तहत 16 जून 2026 को आरोपी सुलेमान को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। वहीं उमेर खान समेत अन्य आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए नैनीताल हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। कार्बेट टाइगर रिजर्व की ओर से न्यायालय में मामले से जुड़े अभिलेखों के साथ अपना पक्ष रखा गया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
20 अगस्त को तीन आरोपियों ने किया सरेंडर
अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद 20 अगस्त 2026 को शेष आरोपी समीर, सलमान और उमेर खान ने रामनगर न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। न्यायालय ने तीनों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।
उपनिदेशक राहुल मिश्रा ने कहा कि वन एवं वन्यजीव अपराधों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अवैध कटान और अन्य वन अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ आगे भी कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। मामले में विभाग की ओर से उप प्रभागीय वनाधिकारी एवं जांच अधिकारी बिन्दर पाल, वन क्षेत्राधिकारी बिजरानी नवीन चंद्र पांडे, अधिवक्ता तरुण सिंह बिष्ट, कोर्ट सेल प्रभारी पीएन जोशी सहित वन विभाग के कर्मचारियों ने प्रभावी पैरवी और समन्वय में भूमिका निभाई।



