
केरल उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण फैसले ने देशभर के फिजियोथेरेपिस्ट समुदाय को बड़ी राहत दी है। अदालत ने फिजियोथेरेपिस्ट के नाम के साथ ‘डॉ.’ उपसर्ग और ‘PT’ प्रत्यय के प्रयोग पर रोक लगाने की मांग से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया है। इस निर्णय के साथ ही इस विषय पर पहले पारित अंतरिम आदेश स्वतः समाप्त हो गया है और केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित व्यवस्था प्रभावी बनी रहेगी।
यह मामला रिट याचिका संख्या WP(C) 41106/2025 से संबंधित था, जिसका निस्तारण 22 जनवरी 2026 को किया गया। याचिका इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (IAPMR) द्वारा दायर की गई थी। याचिका में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रम (2026) में नाम-उपयोग से जुड़े प्रावधानों को चुनौती दी गई थी।
अदालत द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद इस विषय पर बनी असमंजस की स्थिति समाप्त हो गई है। उल्लेखनीय है कि Allied and Healthcare Professions Act, 2021 के अंतर्गत जारी फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रम में फिजियोथेरेपिस्टों को अपने नाम के साथ ‘डॉ.’ उपसर्ग तथा ‘PT’ प्रत्यय के उपयोग का स्पष्ट प्रावधान किया गया है।
हाईकोर्ट के इस फैसले पर उत्तराखंड प्रांतीय भौतिक चिकित्सा सेवा संघ ने प्रसन्नता व्यक्त की है।
उत्तराखंड प्रांतीय भौतिक चिकित्सा सेवा संघ के अध्यक्ष डॉ. आलोक त्यागी (PT) ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय का यह निर्णय फिजियोथेरेपी पेशे के लिए ऐतिहासिक और दूरगामी महत्व का है। इससे लंबे समय से चल रही भ्रांतियां समाप्त हुई हैं और फिजियोथेरेपिस्टों की वैधानिक पहचान को न्यायिक पुष्टि मिली है। उन्होंने कहा कि यह फैसला न केवल पेशे की गरिमा को सुदृढ़ करता है, बल्कि समाज में फिजियोथेरेपिस्टों की भूमिका और योगदान को भी स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है।
संघ के महासचिव डॉ. मुनीश रस्तोगी (PT) ने कहा कि न्यायालय के इस निर्णय से देशभर के फिजियोथेरेपिस्टों में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार हुआ है। Allied and Healthcare Professions Act, 2021 के अंतर्गत प्राप्त अधिकारों को न्यायालय द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन मिलना इस पेशे के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय भविष्य में फिजियोथेरेपी पेशे की पेशेवर पहचान, सम्मान और अधिकारों को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि यह फैसला देशभर के फिजियोथेरेपिस्टों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा और पेशे की वैधानिक पहचान को मजबूती प्रदान करेगा।



