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“कशिश के इंसाफ की जंग: देहरादून की सड़कों पर जनसैलाब, मोमबत्तियों संग उठी आक्रोश की लौ”

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देहरादून

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून आज फिर एक बार इंसाफ की पुकार से गूंजा। सात साल की मासूम कशिश के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है। हैरानी की बात यह है कि इतने जघन्य अपराध के बावजूद आरोपी अब तक कानून के शिकंजे से बच निकला है। इसी अन्याय के खिलाफ आज 19 सितंबर 2025 को उत्तराखंड देवभूमि संगठन द्वारा शहर में एक विशाल कैंडल मार्च निकाला गया ।

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आयोजकों ने बताया कि यह लड़ाई केवल कशिश की नहीं, बल्कि हर बेटी की सुरक्षा और सम्मान की है। पोस्टर पर भी यही संदेश लिखा गया है—
“नन्हीं परी ना तेरी है, ना मेरी है, ये लड़ाई हम सब की है।”

कैंडल मार्च भंडारी चौक से बंगाली कोठी तक निकाला गया ।इसकी शुरुआत शाम 6:30 बजे हुई । बड़ी संख्या में लोगों ने शामिल होकर न्याय की इस लड़ाई को ताकत देने की अपील की है।

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जन आक्रोश और सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि एक मासूम बच्ची के साथ हुए इस अमानवीय अपराध में आरोपी का खुलेआम घूमना कानून और व्यवस्था पर गहरा सवाल खड़ा करता है। “अगर ऐसी घटनाओं में भी न्याय नहीं मिलेगा तो आम जनता कैसे विश्वास करेगी कि उनकी बेटियां सुरक्षित हैं?”—ऐसे सवाल आज हर घर में उठ रहे हैं।

संगठन की भूमिका

संगठन के सदस्यों का कहना है कि सरकार और न्यायपालिका को कठोर कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में कोई और कशिश इस तरह की दरिंदगी का शिकार न हो।

न्याय की गूंज

कैंडल मार्च के जरिए जनता यह संदेश देना चाहती है कि समाज अब चुप नहीं बैठेगा। जब तक मासूम कशिश को इंसाफ नहीं मिलेगा, यह आंदोलन जारी रहेगा।

Faizan Khan Faizy Editorial Advisor

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