
देहरादून
शहर की गलियों में घूमते आवारा कुत्ते और कई बार पालतू कुत्ते भी लोगों पर हमला कर देते हैं। कुत्तों के काटने से सिर्फ़ ज़ख्म ही नहीं होता, बल्कि जानलेवा बीमारी रैबीज़ (Rabies) का ख़तरा भी बढ़ जाता है। यह बीमारी वायरस के कारण होती है और समय पर इलाज न मिलने पर मौत तय मानी जाती है।
🔹 क्या है रैबीज़?
रैबीज़ एक वायरल बीमारी है जो संक्रमित कुत्ते, बिल्ली या अन्य जानवर के काटने से इंसान में फैलती है। यह वायरस सीधा तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को प्रभावित करता है। लक्षण दिखने के बाद अब तक इसका कोई इलाज नहीं है।
🔹 ख़तरे के लक्षण
• काटने वाली जगह पर तेज़ दर्द या जलन
• बुखार और सिरदर्द
• पानी पीने में कठिनाई (Hydrophobia)
• बेचैनी और दौरे
🔹 क्या करें अगर कुत्ता काट ले?
1. तुरंत साबुन और स्वच्छ पानी से 15 मिनट तक घाव धोएं।
2. किसी तरह का तेल, हल्दी या मिर्च पाउडर घाव पर न लगाएं।
3. तुरंत नज़दीकी अस्पताल में जाकर एंटी-रेबीज़ वैक्सीन लगवाएं।
4. यदि ज़रूरत हो तो रेबीज़ इम्यूनोग्लोब्युलिन भी डॉक्टर की सलाह पर लें।
🔹 पालतू कुत्तों के मालिक ध्यान दें
• समय-समय पर कुत्तों का रेबीज़ टीकाकरण करवाएं।
• बच्चों को बिना वजह कुत्तों को छेड़ने या उनके पास जाने से रोकें।
• गलियों के कुत्तों को खाना खिलाने वाले लोग सावधानी बरतें और अचानक उनके पास न जाएं।
👉 याद रखें, रैबीज़ एक 100% रोकी जा सकने वाली बीमारी है, बशर्ते समय पर वैक्सीन लगाई जाए। देर करना जानलेवा साबित हो सकता है।
रेबीज का नहीं है कोई उपचार
डॉ. आरएस बिष्ट के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति रेबीज की चपेट में आ जाए तो उसका कोई उपचार नहीं है। ऐसे में लोगों का जागरूक होना बेहद जरूरी है। अगर किसी को गली या फिर पालतू कुत्ता काटता है तो उसे जरूरी तौर पर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना चाहिए।
दून अस्पताल में हर रोज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे 35 लोग
दून अस्पताल के आपात चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमित अरुण ने बताया कि अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने हर रोज करीब 35 लोग पहुंच रहे हैं। इनमें से 10 से 12 लोग गंभीर घायल होते हैं जिनको एंटी रेबीज के साथ ही सीरम भी लगाना पड़ता है। इन दिनों कुत्ते काटने के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है।



