
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने सोमवार को दून अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया और मरीजों से सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।

निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने सबसे पहले ओपीडी का दौरा किया, जहां उन्होंने मरीजों से उपचार और सुविधाओं से संबंधित फीडबैक लिया। प्रत्येक डॉक्टर के ओपीडी में उपस्थित होने पर उन्होंने संतोष व्यक्त किया और बेहतर कार्य कर रहे चिकित्सकों को सम्मानित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अस्पताल प्राचार्य और एस.एस. को निर्देशित किया कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले डॉक्टरों के नाम चिन्हित कर सूची तैयार करें, ताकि उन्हें विभाग की ओर से सम्मानित किया जा सके।
इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की माता जी जो अस्पताल में भर्ती हैं, उनका हालचाल भी स्वास्थ्य सचिव ने जाना। उन्होंने उनके उपचार और देखभाल के संबंध में डॉक्टरों से विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

डॉ. आर. राजेश कुमार ने अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना की कार्यप्रणाली का भी निरीक्षण किया। उन्होंने मरीजों से कार्ड बनवाने और भर्ती की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान एक हिमाचल प्रदेश से आए मरीज का मामला सामने आया, जिसे तत्काल आयुष्मान कार्ड बनवाकर भर्ती कराया गया। इस तत्पर कार्रवाई की उन्होंने सराहना की।

स्वास्थ्य सचिव ने अस्पताल के विभिन्न विभागों का निरीक्षण करते हुए साफ-सफाई, रंग-रोगन, और डॉक्टरों की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि अस्पताल की इमारतों और वार्डों की नियमित रंगाई-पुताई और स्वच्छता सुनिश्चित की जाए, ताकि मरीजों को बेहतर वातावरण मिल सके।
निरीक्षण के दौरान डायलिसिस यूनिट में तीन शिफ्टों में चल रही डायलिसिस व्यवस्था देखकर उन्होंने संतोष व्यक्त किया और अस्पताल प्रबंधन तथा संबंधित डॉक्टरों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था अन्य सरकारी अस्पतालों के लिए उदाहरण बन सकती है।
निरीक्षण के दौरान उनके साथ निदेशक डॉ. अजय आर्य, अपर निदेशक डॉ. आर.एस. बिष्ट, प्राचार्य डॉ. गीता जैन, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी महेंद्र भंडारी, ट्रीटमेंट कोऑर्डिनेटर संदीप राणा, और आयुष्मान समन्वयक दिनेश रावत समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक मरीज को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिलें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “किसी भी मरीज को इलाज के लिए भटकना न पड़े, यह हमारी जिम्मेदारी है।”



