
देहरादून
राजधानी देहरादून का प्रमुख जिला अस्पताल कोरोनेशन जहां रोज़ाना हज़ारों मरीज इलाज के लिए आते हैं, वहां सुविधाओं की तस्वीर आज भी अधूरी है। हैरानी की बात है कि जिला अस्पताल का दर्जा होने के बावजूद यहां प्राइवेट रूम जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है।
मरीज और उनके परिजन मजबूरी में भीड़भाड़ वाले वार्डों में भर्ती होने को विवश हैं। एक तरफ सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ जिला अस्पताल जैसे अहम केंद्र में प्राइवेट रूम की सुविधा न होना सरकार और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है।
मरीजों का कहना है कि सभी लोग भीड़-भाड़ वाले वार्ड में इलाज कराने को मजबूर हैं, जहां न तो निजता है और न ही आराम। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज और उनके परिजन मजबूरन महंगे प्राइवेट अस्पतालों का रुख करते हैं।
अब सवाल उठता है कि आखिर जिला अस्पताल होते हुए भी कोरोनेशन में मरीजों को प्राइवेट रूम की सुविधा क्यों नहीं दी जा रही? सरकार और अस्पताल प्रशासन को तुरंत इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, वरना जनता का भरोसा सरकारी अस्पतालों से पूरी तरह उठना तय है।
, वहीं अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अस्पताल की जगह सीमित होने के कारण यहां प्राइवेट रूम बनाना संभव नहीं है।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, पुराने ढांचे और सीमित क्षेत्रफल की वजह से नए निर्माण की गुंजाइश नहीं बची है। यही कारण है कि मरीजों को भीड़भाड़ वाले वार्डों में ही भर्ती करना पड़ता है।
लेकिन सवाल यह है कि अगर राजधानी के सबसे बड़े जिला अस्पताल में जगह की कमी है तो सरकार ने अब तक इसके समाधान की दिशा में कदम क्यों नहीं उठाए? बढ़ती आबादी और रोज़ाना आने वाले हज़ारों मरीजों को देखते हुए या तो अस्पताल का विस्तार होना चाहिए या फिर वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।



