
राजधानी के जिला चिकित्सालय कोरोनेशन में व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए जिलाधिकारी सविन बंसल ने सोमवार को स्वयं मोर्चा संभाला और अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान डीएम ने पैथोलॉजी समय बढ़ाने से लेकर निर्माणाधीन ब्लड बैंक, किचन, गायनी ओटी और पार्किंग व्यवस्था तक हर बिंदु पर सख्त निर्देश दिए।

🔴 चंदन लैब पर सख्ती, 3 माह की 24×7 रिपोर्ट तलब
अस्पताल में संचालित अनुबंधित चंदन लैब के 24 घंटे संचालन को लेकर डीएम ने कड़ा रुख अपनाया। रात्रि में लिए गए सैंपलों का विवरण मांगे जाने पर स्पष्ट जानकारी न मिलने पर डीएम ने पिछले तीन माह के दिन-रात्रि सैंपलों की संयुक्त जांच रिपोर्ट एसडीएम सदर और सीएमओ से तलब की है।
साथ ही अनुबंध के अनुरूप 24×7 सेवा न मिलने पर आधा भुगतान रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

🕛 पैथोलॉजी का समय बढ़ा, भीड़ से राहत
सेंट्रल लैब के बाहर भीड़ देखकर डीएम ने तत्काल प्रभाव से सैंपल लेने का समय 1 घंटा बढ़ाकर सुबह 12 बजे तक करने के निर्देश दिए। साथ ही स्पष्ट किया कि आज उपस्थित सभी मरीजों के सैंपल लिए जाएं।
🏥 10 लाख मौके पर स्वीकृत
अस्पताल में किचन, गायनी ओटी, वेयरहाउस और ओपीडी की मरम्मत के लिए डीएम ने मौके पर ही 10 लाख रुपये स्वीकृत कर कार्य शीघ्र शुरू कराने के निर्देश दिए।
🩸 ब्लड बैंक 15 मार्च तक तैयार करने के आदेश
निर्माणाधीन ब्लड बैंक का निरीक्षण करते हुए डीएम ने 15 मार्च 2026 तक कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही थर्ड पार्टी निरीक्षण कराने और चिकित्सक, स्टाफ व उपकरणों की व्यवस्था जिला स्तर से सुनिश्चित करने को कहा।
ऑटोमेटेड पार्किंग 100% क्षमता पर
अस्पताल की ऑटोमेटेड मैकेनिकल पार्किंग पूरी क्षमता से संचालित मिली, जिससे मरीजों, तीमारदारों और आमजन को बड़ी राहत मिल रही है।
गायनी न होने पर रेफर की शिकायत
गायनी चिकित्सक उपलब्ध न होने पर मरीजों को रेफर किए जाने की शिकायत पर डीएम ने एसडीएम और सीएमओ से संयुक्त आख्या मांगी है।
बाल वार्ड में लाइब्रेरी के साथ ड्राइंग-क्लर
बाल वार्ड में निरीक्षण के दौरान बच्चों के हाथ में मोबाइल देखकर डीएम ने अभिभावकों से बच्चों को फोन से दूर रखने की अपील की। अब वार्ड में लाइब्रेरी के साथ ड्राइंग और कलर की व्यवस्था भी की जाएगी ताकि बच्चों की क्रिएटिविटी बढ़े।
🍽️ हिलांस कैंटीन की सराहना
एसएचजीएस हिलांस आउटलेट का निरीक्षण कर डीएम ने भोजन की गुणवत्ता की जानकारी ली। प्रतिदिन लगभग 500 उपभोक्ताओं की क्षमता से संचालित कैंटीन में तीमारदार और स्टाफ संतुष्ट नजर आए।
जीवन रक्षक दवाएं स्टॉक में रहें
डीएम ने फार्मेसी में आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और दवा कंपनियों के साथ हुए एग्रीमेंट का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में अस्पताल की सूरत बदलने की कवायद
डीएम सविन बंसल ने स्पष्ट किया कि जनमानस को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना प्रशासन की प्राथमिकता है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मरीजों और तीमारदारों से सीधे संवाद कर व्यवस्थाओं का फीडबैक लिया और साफ कहा—स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बता दे कि एक ओर जिला प्रशासन अस्पताल की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसी अस्पताल से अव्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाल ही में जिलाधिकारी सविन बंसल ने कोरोनेशन अस्पताल का औचक निरीक्षण कर लैब, ब्लड बैंक, किचन, ओपीडी और पार्किंग व्यवस्थाओं को लेकर सख्त निर्देश दिए। पैथोलॉजी का समय एक घंटा बढ़ाया गया, चंदन लैब की 3 माह की 24×7 रिपोर्ट तलब की गई और अनुबंध उल्लंघन पर आधा भुगतान रोकने तक के आदेश दिए गए।
लेकिन इसी बीच एक युवती का दर्द भरा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें वह अस्पताल की अव्यवस्था की कहानी बयां करती दिख रही है।
हादसे के बाद इलाज को भटकी युवती
जानकारी के मुताबिक, एक कार सवार द्वारा पैर पर गाड़ी चढ़ा देने के बाद घायल युवती इलाज के लिए कोरोनेशन अस्पताल पहुंची। आरोप है कि उसे तत्काल इलाज नहीं मिला, बल्कि पर्ची, बिल और एक्स-रे के लिए अलग-अलग बिल्डिंगों में दौड़ाया गया।
युवती का कहना है कि इमरजेंसी में एक्स-रे की सुविधा नहीं है और पहले ओपीडी की पर्ची कटवाने को कहा गया। वहां से हड्डी रोग विभाग और फिर एक्स-रे के लिए भेजा गया।
व्हीलचेयर भी बनी परेशानी
आरोप है कि जो व्हीलचेयर दी गई, वह इतनी खराब थी कि ठीक से चल भी नहीं रही थी। दर्द से कराहती युवती को अस्पताल के सिस्टम ने और परेशान कर दिया।
उसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह रोते हुए अस्पताल में अव्यवस्था की पोल खोलती नजर आ रही है।
पीएमएस बोले – होगी जांच
अस्पताल प्रशासन की ओर से प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (पीएमएस) डॉ. मन्नू जैन ने कहा है कि वीडियो किस दिन का है, इसकी जानकारी नहीं है। युवती द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी।
डीएम एक्शन मोड में, जमीनी सच्चाई अलग?
एक तरफ डीएम निरीक्षण के दौरान ब्लड बैंक को 15 मार्च तक पूरा करने, दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और लैब पर सख्ती के निर्देश दे रहे हैं।
दूसरी तरफ मरीजों को इमरजेंसी से ओपीडी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
सवाल यही है—
क्या निरीक्षण के दौरान सब ठीक दिखाया जाता है और हकीकत कुछ और होती है?
क्या सिस्टम की खामियां केवल कागजों तक सीमित रह जाती हैं?



