उत्तराखंड

आवारा कुत्तों के हमले पर मुआवजे का प्रावधान ,जानिए नियम और दावा करने की प्रक्रिया

Supreme Court of India ने राज्यों को हमलों में घायल या मृत लोगों को मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार ठहराया; प्रक्रिया और राशि राज्यों के अनुसार अलग।

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देहरादून। 

शहरों और कस्बों में आवारा कुत्तों के हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे मामलों में घायल व्यक्ति को सरकारी स्तर पर मुआवजा मिलने का भी प्रावधान है। हालांकि अलग-अलग राज्यों में इसकी राशि और प्रक्रिया अलग हो सकती है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को आवारा जानवरों के हमलों में घायल या मृत व्यक्तियों को मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
जानकारी के अनुसार, कई राज्यों में आवारा कुत्ते के काटने पर घायल व्यक्ति को उपचार के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। उदाहरण के तौर पर कर्नाटक में घायल व्यक्ति को करीब ₹5,000 तक की सहायता और मृत्यु होने की स्थिति में परिजनों को ₹5 लाख तक का मुआवजा देने का प्रावधान है। वहीं हरियाणा में प्रति दांत के निशान के लिए ₹10,000 और 0.2 सेंटीमीटर से अधिक गहरे घाव पर ₹20,000 तक मुआवजा देने का नियम है।

उत्तराखंड में क्या है स्थिति
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2015 में एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए कुत्ते या बंदर के काटने पर पीड़ित को ₹2 लाख तक मुआवजा देने का प्रावधान किया था, जिसमें ₹1 लाख राज्य सरकार और ₹1 लाख नगर निगम की ओर से दिए जाने की बात कही गई थी। हालांकि बाद में नगर निकायों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश के मुआवजे वाले हिस्से पर रोक लगा दी थी।
वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के हालिया रुख के अनुसार राज्य सरकारों को आवारा जानवरों के हमलों के मामलों में पीड़ितों को उचित और भारी मुआवजा देने के निर्देश दिए जा रहे हैं। कई राज्यों में गंभीर चोट या मृत्यु होने पर ₹5 लाख तक का मुआवजा दिया जा रहा है।

कहां करें आवेदन
यदि किसी व्यक्ति को आवारा कुत्ते ने काट लिया है, तो वह निम्न विभागों के माध्यम से सहायता और मुआवजे के लिए आवेदन कर सकता है—
नगर निगम या नगर पालिका
पशुपालन विभाग

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA)

यदि संबंधित विभाग सुनवाई नहीं करता है, तो पीड़ित जिला न्यायालय स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में भी कानूनी सहायता लेकर मुआवजे का दावा कर सकता है।

दावा करने के लिए जरूरी दस्तावेज
मुआवजे के लिए आवेदन करते समय कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज आवश्यक होते हैं—
पुलिस रिपोर्ट (DDR/FIR): घटना की तारीख, समय और स्थान का स्पष्ट उल्लेख।
मेडिकल रिपोर्ट: सरकारी अस्पताल से प्राप्त उपचार कार्ड, जिसमें घाव की गंभीरता का विवरण हो।
विशेषज्ञों के अनुसार, आवारा कुत्ते के काटने के बाद तुरंत सरकारी अस्पताल में उपचार करवाना और घटना की जानकारी पुलिस या स्थानीय निकाय को देना जरूरी है, ताकि भविष्य में मुआवजे के लिए दावा करने में कोई परेशानी न हो।

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

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