
देहरादून।
गरीब और ज़रूरतमंद मरीजों के लिए केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना शुरू की थी, ताकि इलाज के नाम पर किसी की जेब न कटे। लेकिन राजधानी देहरादून के कई बड़े अस्पताल इस योजना की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
हकीकत यह है कि मरीज को भर्ती कराने के बाद आयुष्मान कार्ड 24 घंटे बाद लागू होता है। इस बीच अस्पताल मरीज और परिजनों से लाखों रुपये का खर्च पहले ही वसूल लेते हैं। बाद में जब कार्ड एक्टिव होता है तो या तो पैसे एडजस्ट करने से कतराते हैं या लंबी-लंबी फाइलों के जाल में मरीज को उलझा देते हैं।
ऐसे हालात में सवाल खड़ा होता है कि – जब इलाज तुरंत चाहिए, तब कार्ड अगर 24 घंटे बाद ही काम करेगा तो आयुष्मान योजना का फायदा क्या?
लोगों का आरोप है कि कई अस्पताल इस देरी का फ़ायदा उठाकर मजबूर मरीजों से मनमाने बिल वसूल रहे हैं। वहीं, गरीब परिवार आर्थिक बोझ तले दब जाते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल सरकार से – क्या ऐसे अस्पतालों पर कोई कड़ी कार्रवाई होगी? क्या मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग इन अस्पतालों की मनमानी पर लगाम लगाएंगे?
आखिरकार योजना गरीबों के लिए है या फिर अस्पतालों की तिजोरी भरने के लिए?



