
उत्तराखंड में कांग्रेस 2027 की तैयारी में जुटी जरूर है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी जस का तस है। पार्टी का चेहरा कौन होगा? 2022 विधानसभा चुनाव में 19 सीटें और 37.9% वोट शेयर कांग्रेस के लिए उम्मीद की किरण थे, मगर 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा की क्लीन स्वीप ने उस उम्मीद पर पानी फेर दिया।
मीडिया में हुई हालिया बहस ने कांग्रेस के नेतृत्व संकट को रेखांकित किया है। गणेश गोदियाल को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। वे संगठन को संभालने में सक्षम माने जाते हैं, लेकिन जनाधार के स्तर पर उनकी पकड़ सीमित दिखती है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या का अनुभव समृद्ध है, पर वे राज्यव्यापी लहर पैदा करने में अब तक सफल नहीं हुए हैं।
हरक सिंह रावत रणनीतिक रूप से मजबूत माने जाते हैं, लेकिन विवादों ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया है। प्रीतम सिंह संतुलित नेता हैं, पर भाजपा की आक्रामक राजनीति के सामने उनकी शैली प्रभावी नहीं दिखती।
इन परिस्थितियों में पार्टी की उम्मीदें फिर से हरीश रावत पर टिकती दिखती हैं। सवाल यह है कि क्या कांग्रेस पुरानी रणनीति पर लौटेगी या नए नेतृत्व को आगे करेगी? 2027 की जंग में स्पष्ट चेहरा न होने की स्थिति कांग्रेस के लिए भारी पड़ सकती है।


