
गैरसैंण विधानसभा का मानसून सत्र ठंड और हंगामे की जंग में उलझकर आखिरकार अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। 19 अगस्त से शुरू हुआ यह सत्र 22 अगस्त तक चलना प्रस्तावित था, लेकिन विपक्ष के तीखे तेवरों और लगातार हंगामे के चलते दो दिन भी पूरे नहीं हो पाए।
पिछले सत्र में जब विधायकों को “ठंड लगने” की बात ने सुर्खियां बटोरी थीं, तो इस बार सत्र ने खुद ही ठिठुरन का शिकार होकर दम तोड़ दिया। विपक्ष ने सरकार पर जनहित से भागने और असुविधाओं से बचने का आरोप लगाया, वहीं सरकार ने 2025-26 का अनुपूरक बजट पेश कर अपनी जिम्मेदारी पूरी करने का दावा किया।
अब सवाल यह है कि गैरसैंण की ठंडी हवाओं से कांप रहे माननीय क्या जनता की गर्म समस्याओं पर उतनी ही गंभीरता से चर्चा करने का साहस दिखा पाएंगे, या फिर हर बार सत्र “ठंडक” और “हंगामे” की भेंट चढ़ेगा?



