
देहरादून
राजधानी के सहस्त्रधारा क्षेत्र में हालिया आपदा राहत कार्यों के दौरान एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने सरकार और प्रशासन के तालमेल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी जिलाधिकारी देहरादून से नाराज़ नज़र आते हैं, केवल इसलिए कि डीएम ने उनका फोन नहीं उठाया।
इस दौरान देखा गया कि जिलाधिकारी पूरी विनम्रता और धैर्य का परिचय देते हुए हाथ जोड़कर स्थल से रवाना हो जाते हैं। वहीं मंत्री का यह व्यवहार मौके पर मौजूद कई लोगों को असहज कर गया। कप्तान (एसएसपी) भी बिना रुके आगे बढ़ते दिखते हैं, जबकि मंत्री कुछ देर अवाक खड़े रह जाते हैं।
हैरानी की बात यह है कि मंत्री स्वयं स्वीकार करते हैं कि उन्होंने पहले ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कमिश्नर विनय शंकर पांडेय और एसडीएम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से बात कर ली थी। ऐसे में आपदा राहत कार्यों के बीच जिलाधिकारी से “अलग से” बातचीत की जिद करना कहीं न कहीं गैर-ज़रूरी और गैर-जिम्मेदाराना आचरण माना जा रहा है।
आपदा जैसी संवेदनशील घड़ी में, जब हर मिनट राहत और बचाव कार्यों के लिए अहम होता है, तब व्यक्तिगत नाराज़गी जताना जनता के प्रति संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है। डीएम का संयमित रवैया इस बात को दर्शाता है कि उनके लिए प्राथमिकता केवल प्रभावित जनता तक समय से मदद पहुंचाना था, न कि राजनीतिक नाराज़गी का जवाब देना।
प्रशासनिक तंत्र से जुड़े सूत्रों के मुताबिक जिलाधिकारी और पूरी टीम मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार मौके पर डटी हुई है और राहत कार्यों में कोई ढिलाई नहीं बरती जा रही। ऐसे में मंत्री की यह नाराज़गी न केवल बेवजह लगती है, बल्कि आपदा के समय जनता के भरोसे पर भी चोट करती है।
यह वीडियो साफ करता है कि असली नेतृत्व वही है, जो विपत्ति की घड़ी में व्यक्तिगत अहं से ऊपर उठकर जनता और प्रशासन के साथ खड़ा हो। जिलाधिकारी देहरादून ने अपने आचरण से यह साबित किया है कि आपदा के समय धैर्य और जिम्मेदारी ही सबसे बड़ी ताकत है।



