
को Effects Kids: आजकल बच्चों को कम उम्र में स्मार्टफोन देना आम हो गया है। एक नई स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि कम उम्र के बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन देने से उनके सेहत पर कई नकारात्मक असर पड़ते हैं। अमेरिका के ‘एबीसीडी स्टडी’ के तहत 10,000 से अधिक बच्चों पर किए गए इस व्यापक शोध में पाया गया कि जिन बच्चों को 12 साल की उम्र से पहले अपना पहला स्मार्टफोन मिला, उनमें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम काफी ज्यादा बढ़ गया।
स्मार्टफोन बच्चों के मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को धीरे-धीरे खराब कर रहा है। शोध में बताए गए आंकड़ों के अनुसार, 12 साल से कम उम्र में फोन पाने वाले बच्चों में नींद की समस्याओं का जोखिम 60%, मोटापे का 40% और डिप्रेशन (अवसाद) का जोखिम 30% अधिक पाया गया। यह डेटा स्पष्ट रूप से दिखाता है कि बच्चों को स्मार्टफोन देना केवल एक सुविधा नहीं है, बल्कि यह उन्हें गंभीर बीमारियों के बुलावे जैसा है। इन परिणामों को नजरअंदाज करना उनके भविष्य के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है।

मानसिक विकास पर नकारात्मक असर
12 साल की उम्र बच्चों के मानसिक विकास के लिए एक बेहद संवेदनशील अवधि होती है। इस दौरान सोशल मीडिया पर दूसरों से लगातार तुलना, साइबर बुलिंग और किसी भी सामाजिक गतिविधि से छूट जाने का डर यानी ‘फोमो’ FOMO मानसिक तनाव को कई गुना बढ़ा देते हैं। कम उम्र में लगातार स्क्रीन एक्सपोजर बच्चों के प्राकृतिक सामाजिक और भावनात्मक विकास को भी बाधित करता है।

स्लीप साइकिल और ब्लू लाइट का प्रभाव
स्क्रीन टाइम बढ़ने का सीधा असर बच्चों की नींद की गुणवत्ता पर पड़ता है। स्मार्टफोन और टैबलेट से निकलने वाली ब्लू लाइट मस्तिष्क में मेलाटोनिन (नींद पैदा करने वाला हार्मोन) के उत्पादन को दबा देती है। इससे उनका नेचुरल स्लीप साइकिल बिगड़ जाता है, जिसके कारण बच्चों को नींद न आने की समस्या और एकाग्रता की कमी का सामना करना पड़ता है।

शारीरिक गतिविधि में कमी और मोटापा
स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग से बच्चों की शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है। बच्चे बाहर खेलने या सक्रिय रहने के बजाय स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं। शारीरिक श्रम की कमी और निष्क्रिय जीवन शैली मोटापे का कारण बनती है। मोटापा अपने आप में डायबिटीज और हृदय रोग सहित कई अन्य बीमारियों के जोखिम को बढ़ाता है।

विशेषज्ञों का स्पष्ट सुझाव है कि बच्चों को पर्सनल स्मार्टफोन देने के लिए कम से कम 12 साल की उम्र तक इंतजार करना चाहिए। शुरुआती दौर में, उन्हें केवल इमरजेंसी के लिए इंटरनेट के बिना बेसिक फोन दिया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण नियम है ‘नो-फोन इन बेडरूम’ यानी सोते समय स्मार्टफोन को बेडरूम से दूर रखना, ताकि उनकी स्लीप साइकिल बाधित न हो।नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।



