
देहरादून
उत्तराखंड स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत देहरादून शहर में विकास के नए अध्याय लिखे जा रहे हैं। बेहतर सड़कें, आधुनिक ट्रैफिक सिस्टम, स्मार्ट लाइट्स और डिजिटल नागरिक सेवाएं – ये सभी पहलू शहर को स्मार्ट सिटी की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। लेकिन इस बदलाव में एक अहम वर्ग को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है — नगर निगम के सफ़ाई कर्मचारी।
शहर की सफ़ाई व्यवस्था को बनाए रखने वाले ये कर्मचारी देहरादून की रीढ़ की हड्डी हैं। सुबह-सुबह सड़कों पर झाड़ू लगाते, कूड़ा उठाते और नालियों की सफ़ाई करते हुए ये कर्मचारी शहर को स्वच्छ और स्वस्थ बनाए रखते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि जहां शहर स्मार्ट बन रहा है, वहीं इन कर्मियों की बुनियादी ज़रूरतें अब भी पूरी नहीं हो पा रही हैं।
यूनिफ़ॉर्म: सम्मान और सुरक्षा दोनों का प्रतीक
वर्तमान में अधिकांश सफ़ाई कर्मियों के पास न तो कोई तयशुदा यूनिफ़ॉर्म है और न ही पहचान पत्र। इससे एक ओर उनकी पहचान मुश्किल होती है, वहीं दूसरी ओर कई बार उन्हें असम्मानजनक व्यवहार का भी सामना करना पड़ता है। यदि उन्हें स्मार्ट यूनिफ़ॉर्म मुहैया कराई जाए — जिसमें हाई-विज़िबिलिटी जैकेट, दस्ताने, और कार्य के अनुसार जूते शामिल हों — तो न सिर्फ़ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि उन्हें एक पेशेवर सम्मान भी मिलेगा।
सामाजिक पहचान और आत्मसम्मान की ज़रूरत
यूनिफ़ॉर्म किसी भी कर्मचारी की सामाजिक पहचान को मज़बूत करती है। इससे काम करने वाले व्यक्ति को आत्मसम्मान की अनुभूति होती है और जनता भी उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक कर्मचारी के रूप में देखती है। स्मार्ट सिटी का सपना तभी पूरा होगा जब उसमें काम करने वाले हर व्यक्ति को समान सम्मान और सुविधा दी जाएगी।
प्रशासन से अपेक्षा
देहरादून नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़े अधिकारियों से अपील की जा रही है कि वे सफ़ाई कर्मचारियों के लिए यूनिफ़ॉर्म को अनिवार्य करें। इसके लिए विशेष बजट का प्रावधान किया जाए और हर वार्ड स्तर पर इसका क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
यूनिफ़ॉर्म पहनने से:
• कर्मचारियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा
• सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिहाज़ से भी यह जरूरी है, क्योंकि सही कपड़े और जूते उन्हें संक्रमण या चोट से बचा सकते हैं
• लोगों में सम्मान की भावना बढ़ेगी, जब वे देखेंगे कि नगर निगम अपने सफ़ाईकर्मियों को उचित ड्रेस और सुविधाएं दे रहा है
जनभागीदारी भी ज़रूरी
शहरवासियों को भी चाहिए कि वे इन कर्मचारियों का सम्मान करें, उनके कार्य में सहयोग दें और सफ़ाई के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी समझें। स्मार्ट सिटी सिर्फ़ तकनीक से नहीं बनती, उसमें इंसानियत और सम्मान का भी बड़ा योगदान होता है।
देहरादून बने उदाहरण
देहरादून, जो देशभर में पर्यावरणीय जागरूकता और शिक्षा के लिए जाना जाता है, अगर अपने सफ़ाईकर्मियों को यूनिफ़ॉर्म मुहैया कराता है, तो यह अन्य शहरों के लिए एक प्रेरणा बन सकता है। यह दिखाएगा कि स्मार्ट सिटी सिर्फ तकनीक से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता से भी बनती है।



