उपनल कर्मचारियों के मामले में सरकार की बढ़ी मुश्किलें, 10 सितंबर को हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

देहरादून। उपनल कर्मचारियों का मामला करीब एक दशक बाद भी सुलझता नजर नहीं आ रहा है। हाईकोर्ट के आदेश और सुप्रीम कोर्ट से सरकार की अपील खारिज होने के बावजूद कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन का पूरा लाभ नहीं मिल पाया है। अब इस मामले में सरकार के सामने अवमानना की कार्रवाई का दबाव भी बढ़ गया है।
दरअसल, वर्ष 2018 में हाईकोर्ट ने उपनल कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश दिया था। नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी होने तक कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन देने के निर्देश भी दिए गए थे। सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां भी सरकार की अपील खारिज हो गई। इसके बाद राज्य सरकार ने कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर उपनल कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन देने को मंजूरी दी थी।
इसके बावजूद लंबे समय बाद भी आदेश का पूरी तरह पालन नहीं हो सका है। इसी बीच कैबिनेट की बैठक में उपनल कर्मचारियों को वी.डी.ए. (Variable Dearness Allowance) का लाभ देने का फैसला लिया गया, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है। उपनल कर्मचारी महासंघ ने सरकार के इस फैसले का विरोध करने की बात कही है।
उपनल कर्मचारी महासंघ के प्रदेश महामंत्री प्रमोद सिंह गुसाईं का आरोप है कि सरकार हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने के बजाय नए रास्ते तलाश रही है। उनका कहना है कि समान काम के बदले समान वेतन के बजाय वी.डी.ए. देने का फैसला कर्मचारियों के हित में नहीं है और इसका विरोध किया जाएगा।
वहीं, मामले में हाईकोर्ट में 10 सितंबर को अवमानना याचिका पर सुनवाई होनी है। कोर्ट ने मामले में शासन के तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं। इनमें सचिव कार्मिक, सचिव वित्त और सचिव सैनिक कल्याण शामिल हैं। ऐसे में अगली सुनवाई से पहले सरकार पर हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन को लेकर दबाव और बढ़ गया है।
उपनल कर्मचारियों की नाराजगी पर सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की वित्तीय स्थिति को देखते हुए फैसले ले रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्या के समाधान के लिए नया रास्ता तलाशा जाएगा।
सरकार लगातार राज्य की वित्तीय स्थिति का हवाला देती रही है। वहीं, हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन और अवमानना मामले में अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी तय होने के बाद अब सरकार के सामने कर्मचारियों के मामले को लेकर जल्द ठोस कदम उठाने की चुनौती है।


