स्वाइन फ्लू- H1N1 को लेकर बड़ी खबर: नया म्यूटेशन नहीं, डॉ. कुमार जी कौल ने बताए खतरे और बचाव के तरीके
स्वाइन फ्लू पर डॉक्टर की बड़ी सलाह: डॉ. कुमार जी कौल बोले- खुद से एंटीबायोटिक लेना पड़ सकता है भारी

देहरादून
देश में अगस्त के दौरान स्वाइन फ्लू यानी H1N1 संक्रमण के मामलों में मौसमी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के अनुसार वर्तमान में फैल रहा वायरस कोई नया स्ट्रेन या नया म्यूटेशन नहीं है, बल्कि पहले से पहचाना हुआ A(H1N1)pdm09 सीजनल स्ट्रेन है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा फ्लू वैक्सीन भी इस स्ट्रेन से अच्छी तरह मेल खाती है। ज्यादातर मामलों में संक्रमण हल्का रहता है और मरीज सामान्य देखभाल के साथ ठीक हो जाते हैं। हालांकि, बुजुर्गों, छोटे बच्चों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
क्या हैं H1N1 के प्रमुख लक्षण?
स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही होते हैं। संक्रमण के संपर्क में आने के करीब 3 से 5 दिन बाद लक्षण सामने आ सकते हैं। इनमें—
- बुखार और ठंड लगना
- सूखी खांसी
- गले में खराश
- मांसपेशियों और शरीर में दर्द
- सिरदर्द
- थकान और कमजोरी
शामिल हैं।
बच्चों में इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
छोटे बच्चों में लक्षण अलग या अधिक गंभीर रूप में दिखाई दे सकते हैं। यदि बच्चे को सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक सुस्ती या उठने में दिक्कत, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ न लेना, चकत्तों के साथ बुखार या भ्रम की स्थिति दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
डॉक्टर की सलाह—लापरवाही से बचें, खुद से एंटीबायोटिक न लें
सीनियर फिजिशियन एवं कंसल्टेंट डॉ. कुमार जी कौल के मुताबिक, H1N1 संक्रमण से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता और सावधानी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोने, भीड़भाड़ वाली बंद जगहों और सार्वजनिक स्थानों पर मास्क का इस्तेमाल करने तथा खांसते-छींकते समय मुंह और नाक ढकने की सलाह दी है।
डॉक्टर के अनुसार, तेज बुखार या फ्लू जैसे लक्षण होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं नहीं लेनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच और उचित उपचार की सलाह लेनी चाहिए।
संक्रमण फैलने से कैसे बचें?
H1N1 से बचाव के लिए कुछ सामान्य सावधानियां बेहद कारगर हो सकती हैं। खांसते या छींकते समय टिश्यू या कोहनी का इस्तेमाल करें, बार-बार हाथ धोएं और आंख, नाक तथा मुंह को अनावश्यक रूप से छूने से बचें। बीमार व्यक्ति से उचित दूरी बनाए रखें और यदि खुद बीमार हैं तो घर पर रहकर आराम करें।
इसके अलावा कप, स्ट्रॉ, चम्मच और अन्य निजी इस्तेमाल की वस्तुएं दूसरों के साथ साझा न करें।
घबराने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत
विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल H1N1 का मौसमी प्रसार किसी नए वायरस के सामने आने का संकेत नहीं है। इसलिए लोगों को अफवाहों और अनावश्यक डर से बचते हुए लक्षणों की पहचान, साफ-सफाई, मास्क और समय पर चिकित्सकीय सलाह पर ध्यान देना चाहिए।
खासकर बुजुर्गों और छोटे बच्चों में यदि लक्षण गंभीर दिखाई दें तो इलाज में देरी न करें।


