
भारतीय युवा कांग्रेस ने उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष पद के परिणाम घोषित कर दिए हैं। विशाल भोजक को उत्तराखंड युवा कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि सौरभ ममंगाईं और अंशुल रावत को वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, परिणाम सामने आते ही विवाद भी शुरू हो गया है।
अल्मोड़ा से जिला अध्यक्ष पद के प्रत्याशी शुभांशु रौतेला ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाया है। शुभांशु का दावा है कि न केवल वोटों की गिनती में गड़बड़ी हुई है, बल्कि वोटर आईडी (EPIC) के साथ भी छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने इस संबंध में पहले ही एसएसपी अल्मोड़ा को एक शिकायत पत्र सौंप दिया था।
शुभांशु रौतेला के अनुसार, कई मतदाताओं की एपिक डिटेल कॉपी कर, उसमें किसी अन्य व्यक्ति की फोटो लगाकर फर्जी तरीके से वोट डलवाए गए। जांच के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जिस आईडी से वोट डाला गया, वहीं निर्वाचन की वेबसाइट पर उसकी उम्र 70 वर्ष से ज्यादा पाई गई है। इस खुलासे के बाद संगठन के भीतर निष्पक्ष चुनाव कराने के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं।उत्तराखंड यूथ कांग्रेस के चुनावों में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े और धांधली का मामला सामने आया है।
इस पूरे प्रकरण को लेकर जब हमने शुभांशु से बात की, तो उन्होंने चौंकाने वाले खुलासे किए।
फर्जी आईडी और होटल मैनेजमेंट संस्थानों का खेल
शुभांशु ने बताया कि जब सदस्यता अभियान (मेंबरशिप) चल रहा था, तब उनकी टीम नियमानुसार प्रक्रिया पूरी कर रही थी। लेकिन इसी बीच उन्हें सूचना मिली कि कुछ लोग चुनिंदा गांवों और होटल मैनेजमेंट संस्थानों में जाकर आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। आरोप है कि ये लोग खुद ही आईडी कार्ड उपलब्ध करा रहे थे।
शुभांशु के अनुसार, “जांच के दौरान हमारे हाथ कुछ ऐसी आईडी लगीं, जिन्हें पहली नजर में देखने पर ही उनके ‘फैब्रिकेटेड’ या डुप्लीकेट होने का साफ पता चल रहा था। वे ओरिजिनल आईडी की तस्वीरें कतई नहीं थीं।”
तकनीकी हेरफेर:77 साल का वोटर बना दिया 35 का
इस फर्जीवाड़े का सबसे गंभीर पहलू वोटर कार्ड के एपिक (EPIC) नंबर से जुड़ा है। जांच में पाया गया कि कार्ड पर दर्ज एपिक नंबर तो असली थे, जो चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी दर्ज हैं। लेकिन डेटा के साथ छेड़छाड़ कर उनकी उम्र बदल दी गई। उदाहरण के तौर पर: इलेक्शन कमीशन की साइट पर जो वोटर 77 साल का दर्ज है, उसे फोटो एडिटिंग के जरिए कार्ड पर 35 साल का दिखाकर वोट डलवाया गया। दावा है कि इसी तरह की एडिटिंग के जरिए हजारों फर्जी वोट डलवाए गए।
स्थानीय लोगों ने खोली पोल
शुभांशु ने बताया कि उन्हें इस धांधली की भनक तब लगी जब वे अल्मोड़ा के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों से संपर्क कर रहे थे। उन्होंने कहा, “अल्मोड़ा छोटा शहर है, यहाँ बातें छिपी नहीं रहतीं। स्थानीय लोगों ने हमें बताया कि कुछ लोग उनके पास आए थे, जिनके पास पहले से ही वोटर आईडी कार्ड थे। उन्हें मतदाताओं से आईडी नहीं चाहिए थी, वे सिर्फ उनका फोन नंबर और ओटीपी (OTP) मांग रहे थे।”
पुलिस में शिकायत और पार्टी का दबाव
मामले की गंभीरता को देखते हुए शुभांशु ने अल्मोड़ा SSP को लिखित शिकायत दर्ज करवाई है। हालांकि, उनका आरोप है कि मामला उजागर होने के बाद उनकी अपनी ही पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं ने उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।
शुभांशु ने कहा, “मुझसे कहा गया कि इस मामले को आगे न बढ़ाएं क्योंकि इससे पार्टी की छवि खराब होगी। लेकिन मैंने इस पूरे घटनाक्रम और सबूतों के साथ पार्टी के आलाकमान और बड़े नेताओं को ईमेल के जरिए सूचित कर दिया है।”
जिस तरह इस पूरे मामले की जानकारी सामने आई है उस सवाल खड़े होते हैं कि क्या वोट चोरी सिर्फ अल्मोड़ा तक ही सीमित है या फिर बड़े स्तर पर प्रदेश भर में फोटो के टेंपरिंग यूथ कांग्रेस के इलेक्शन में की गई है।
ये पूरी खबर शुभांशु द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर बनाई गई है।






























