
देहरादून, 22 जून 2026 — उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य में पिछले दस वर्षों में हुए भूमि आवंटन, सरकारी भूमि के संदिग्ध हस्तांतरण, भूमि उपयोग परिवर्तन और विभिन्न भूमि घोटालों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। गोदियाल ने कहा कि सीमित भौगोलिक संसाधनों वाले पर्वतीय राज्य में भूमि और प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
गोदियाल ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे प्रकरण सामने आए हैं जिनमें शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली और सरकारी संसाधनों के संरक्षण पर गंभीर प्रश्न उठते हैं। वर्ष 2025 में हरिद्वार नगर निगम द्वारा की गई भूमि खरीद के मामले में जांच में अनियमितताओं की पुष्टि हुई और कई अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई हुई। यह प्रकरण स्पष्ट करता है कि भूमि मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।
हालिया आरोपों में मसूरी के जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र के आवंटन, डाकपत्थर क्षेत्र में जल विद्युत निगम की लगभग 180 एकड़ भूमि के हस्तांतरण तथा नैनीताल के रामगढ़ क्षेत्र में सरकारी भूमि के निजी हाथों में सौंपे जाने के मामले प्रमुख हैं। गोदियाल ने कहा कि कई जनपदों में निजी व्यक्तियों और सरकारी विभागों के नाम पर दर्ज बहुमूल्य भूमि के छोटे-छोटे टुकड़े किए जाने, नियमों के विपरीत हस्तांतरण और निजी हितों के लिए उपयोग के मामले सामने आए हैं।
लैंड बैंक पर चिंता
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) द्वारा विकसित किए जा रहे “लैंड बैंक” को लेकर भी जनता में आशंकाएँ होने का उल्लेख किया। उनका कहना था कि राजस्व, पर्यटन, उद्यान, कृषि, सिडकुल और ऊर्जा निगमों की भूमि को एकत्रित कर भविष्य में निजी हितों के लिए उपयोग किए जाने की संभावनाओं से जनता चिंतित है।
सामुदायिक भूमि पर संकट
गोदियाल ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय पशुपालकों और ग्रामीण समुदायों द्वारा वर्षों से उपयोग में लाई जा रही चरागाह और पंचायती भूमि संकट में है। प्रतापनगर सहित कई जिलों में ग्रामीण अपनी पारंपरिक भूमि बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और न्यायालयों व सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।
कांग्रेस की मांगें
पिछले दस वर्षों में हुए प्रमुख भूमि आवंटनों, खरीद-फरोख्त, हस्तांतरणों और भूमि उपयोग परिवर्तन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
विभिन्न विभागों की भूमि के हस्तांतरण और निजी संस्थाओं को किए गए आवंटनों की समीक्षा के लिए स्वतंत्र जांच आयोग गठित किया जाए।
सरकारी भूमि पर हुए नियम-विरुद्ध कब्जों और संदिग्ध हस्तांतरणों की पहचान कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जांच पूरी होने तक विवादित भूमि आवंटनों व हस्तांतरणों पर रोक लगाने पर विचार किया जाए।
राज्य की सामुदायिक, पंचायती और चरागाह भूमि के संरक्षण के लिए स्पष्ट और कठोर नीति बनाई जाए।
अगला कदम
गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही महामहिम राज्यपाल से भेंट कर मामले में हस्तक्षेप कराने और राज्य के भूमि संसाधनों की सुरक्षा हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराने की मांग करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश कांग्रेस किसी भी कीमत पर उत्तराखंड की जल, जंगल और जमीन से समझौता नहीं होने देगी और जनता के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
प्रदर्शन में उपस्थित लोग
प्रदर्शन में राष्ट्रीय सचिव एवं विधायक काजी निजामुउद्दीन, फुरकान अहमद, लखपत बुटोला, बिरेन्द्र जाति, महामंत्री राजेन्द्र भणरी, राजपाल खरोला, उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, महामंत्री गोदावरी थापली, राजेन्द्र शाह, पूर्व विधायक राजकुमार, उपेंद्र थापली, प्रवक्ता गरिमा महरा दसौनी, डॉ. प्रतिमा सिंह, राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा, वीरेंद्र पोखरियाल, अभिनव थापर, जिलाध्यक्ष, महिला प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला, एनएसयूआई अध्यक्ष विकास नेगी समेत अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।



