
स्वास्थ्य विश्राम से लौटे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कल प्रसिद्ध मानक सिद्ध, लक्ष्मण सिद्ध, माडू सिद्ध और कालू सिद्ध मंदिरों की एक दिवसीय यात्रा के दौरान सहसपुर विधानसभा क्षेत्र स्थित मानक सिद्ध मंदिर कारबारी तथा माडू सिद्ध मंदिर पौंधा-आमवाला पहुंचकर दर्शन किए।
सिद्ध मंदिरों की यात्रा पर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया
जिस सहसपुर में हरक सिंह रावत बोल रहे है हल्ला वहाँ साथ दिखे हरीश रावत और आर्येंद्र शर्मा जिससे सियासी गलियारों मे चर्चा है की ये जोड़ी साथ रही तो हरक सिंह की दावेदारी कमजोर पड़ जाएगी।
आपको बता दे आर्येंद्र शर्मा मंझे हुए राजनेता है और अत्यंत कुशल और कद्दावर नेता स्व. नारायण दत्त (एन.डी.) तिवारी जी के शागिर्द है।
2017 मे आयेंद्र शर्मा ने दिखा दिया था दम जब पार्टी ने आँक लिया था कम
2017 के विधानसभा चुनाव मे उस वक़्त कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय मुख्यमंत्री हरीश रावत के कहने पर खुद सहसपुर से चुनाव लड़ने उतर पड़े और आयेंद्र शर्मा का टिकट काट दिया गया शर्मा लगातार छेत्र मे कार्य कर रहे थे समर्थको के दबाव मे वे निर्दलीय लड़ने कूद पड़े और 23000 वोट हासिल किए प्रदेश अध्यक्ष किशोर भी चुनाव हार गए आयेंद्र शर्मा ने पार्टी को एहसास दिलाया की वो छेत्र मे कितना दम ख़म रखते है।
2022 के चुनाव मे आयेंद्र शर्मा ने बम्पर वोट प्राप्त किये उन्हें 56000 वोट मिले लेकिन फिर भी वो चुनाव हार गए हार का कारण रहा उनके ही छेत्र के नेता का मुस्लिम यूनिवर्सिटी वाला बयान लेकिन आयेंद्र शर्मा ने उसके बाद भी सहसपुर की जनता का साथ नही छोड़ा वो अभी भी छेत्र मे लगातार कार्य कर रहे है ऐसे मे ये तो साफ है की आयेंद्र शर्मा के बिना कांग्रेस सहसपुर नही जीत सकती जिसका कारण है उनके साथ जुडा हुआ उनका वोट बैंक जो व्यक्तिगत तोर पर आयेंद्र शर्मा के साथ है फिर चाहे वो किसी भी पार्टी से हो या निर्दलीय
हरदा को भी आयेंद्र की ताकत का एहसास है अगर हरदा का साथ आयेंद्र शर्मा को मिला तो ये जोड़ी सहसपुर पर खेला कर सकती है।
यदि हरक सिंह को टिकट भी हुआ तो उस सूरत मे भी आयेंद्र शर्मा को साथ लिए बिना वो सहसपुर जीतने की कल्पना भी नही कर सकते क्यूंकि आयेंद्र शर्मा 20 सालो से सहसपुर मे मेहनत कर रहे है यही कारण है की पार्टी से अलग भी उनका खुद का सहसपुर मे वोट बैंक है जो हार जीत मे अहम भूमिका निभाएगा।




