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विवादित मुठभेड़ स्पेशलिस्ट नरेश राठौर पर कैसे मेहरबान कप्तान डोभाल क्या पूर्व इतिहास को किया जा रहा अनदेखा ?

Why is Captain Doval showing favor toward 'encounter specialist' Naresh Rathore—a man linked to controversial encounters? Is his past record being overlooked?

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2018 में हाईकोर्ट तक पहुंची शिकायत, 2022 में महिला की मौत के बाद विभागीय जांच, 2026 में दंपती की शिकायत पर अदालत ने दिए जांच के आदेश

देहरादून। राजधानी देहरादून की पटेल नगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक नरेश सिंह राठौर एक बार फिर चर्चाओं में हैं। उनके पूर्व कार्यकाल से जुड़े मामलों और हालिया न्यायालयीन आदेश ने पुलिस विभाग की जवाबदेही, शिकायतों के निस्तारण तथा निष्पक्ष जांच की व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं।

उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और न्यायालयीन रिकॉर्ड के अनुसार, नरेश राठौर का नाम वर्ष 2018, 2022 और 2026 के अलग-अलग घटनाक्रमों में सामने आया है। इन मामलों की प्रकृति अलग-अलग है, लेकिन पुलिस मुख्यालय के सामने यह सवाल जरूर है कि पुराने मामलों में हुई जांच का परिणाम क्या रहा और वर्तमान मामले में निष्पक्ष कार्रवाई कैसे सुनिश्चित की जाएगी?

2026: प्रेमनगर थाने में दंपती से कथित मारपीट, अदालत ने दिए जांच के आदेश

सितंबर 2026 में प्रेमनगर थाने से जुड़ा एक मामला सामने आया, जिसमें एक दंपती ने तत्कालीन थाना प्रभारी नरेश सिंह राठौर समेत पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए।

शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, दंपती को थाने बुलाकर कथित रूप से मारपीट और उत्पीड़न किया गया। आरोपों में 20 लाख रुपये के कथित समझौते का दबाव बनाने तथा बिना मुकदमा दर्ज किए पूछताछ करने की बात भी शामिल है।

इस मामले में द्वितीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM-II), देहरादून की अदालत ने 11 सितंबर 2026 को उपलब्ध दस्तावेजों और पुलिस रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(3) के तहत विधिवत जांच के आदेश दिए।

रिपोर्टों के अनुसार, मामले में नरेश सिंह राठौर के अलावा अन्य पुलिसकर्मियों के नाम भी शामिल हैं। अदालत ने निरीक्षक स्तर के अधिकारी के आरोपी होने के कारण उससे वरिष्ठ अधिकारी से जांच कराने का निर्देश दिया।

यहां महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अदालत का आदेश जांच कराने का है, आरोपों को अंतिम रूप से सही ठहराने का नहीं। पुलिस जांच का निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।

2022: सहसपुर में महिला की मौत और थाना प्रभारी पर उठे सवाल

नरेश राठौर से जुड़ा दूसरा महत्वपूर्ण घटनाक्रम नवंबर 2022 का है, जब वह सहसपुर थाने के प्रभारी थे।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 29 अक्टूबर 2022 को एक महिला ने सहसपुर थाने में उत्पीड़न की शिकायत दी थी। इसके बाद 1 नवंबर 2022 को महिला की मृत्यु हो गई।

इस घटनाक्रम के बाद तत्कालीन एसएसपी ने थाना प्रभारी नरेश राठौर को पुलिस लाइन अटैच किया था और उनके विरुद्ध विभागीय जांच बैठाए जाने की जानकारी सार्वजनिक हुई थी।

इस मामले में आज भी कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सार्वजनिक होने चाहिए:

महिला की शिकायत पर थाने में क्या कार्रवाई की गई थी?

शिकायत का समय रहते निस्तारण क्यों नहीं हुआ?

विभागीय जांच की अंतिम रिपोर्ट क्या रही?

क्या किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई?

यदि जांच पूरी हुई तो उसके निष्कर्ष सार्वजनिक क्यों नहीं हैं?

2018: उत्तराखंड हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला

नरेश सिंह राठौर से संबंधित एक अन्य महत्वपूर्ण न्यायालयीन रिकॉर्ड 20 नवंबर 2018 का है।

उत्तराखंड हाईकोर्ट में WPMS संख्या 3485/2018, Naresh Singh Rathod बनाम Uttarakhand Minority Commission के मामले में न्यायालय के समक्ष एक महिला द्वारा उत्पीड़न की शिकायत का विषय भी आया था।

उस समय नरेश राठौर सहसपुर थाने के स्टेशन ऑफिसर थे।

हाईकोर्ट ने महिला की शिकायत पर विचार करने के लिए उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए थे। अदालत ने कहा था कि यदि उचित लगे तो मामले को पुलिस शिकायत प्राधिकरण जैसी उच्च संस्था के समक्ष भेजा जा सकता है।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि हाईकोर्ट ने इस मामले में नरेश राठौर को दोषी घोषित नहीं किया था। अदालत का निर्देश शिकायत पर उचित विचार और आवश्यक कार्रवाई से संबंधित था।

अब पुलिस मुख्यालय से इन सवालों का जवाब कौन देगा?

तीन अलग-अलग वर्षों के घटनाक्रम सामने आने के बाद अब देहरादून पुलिस और पुलिस मुख्यालय की जवाबदेही महत्वपूर्ण हो जाती है।

वर्ष 2018 की शिकायत पर डीजीपी स्तर से क्या कार्रवाई हुई?

वर्ष 2022 में बैठाई गई विभागीय जांच का क्या परिणाम निकला?

क्या 2022 की जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आई थी?

सितंबर 2026 में अदालत के आदेश के बाद जांच किस अधिकारी को सौंपी गई?

क्या 2026 के मामले में निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी की मांग पर विचार किया गया?

नरेश राठौर की पूरी पोस्टिंग हिस्ट्री और विभागीय सेवा रिकॉर्ड में दर्ज प्रतिकूल टिप्पणियों की स्थिति क्या है?

ये सब जवाब भारत न्यूज़ फर्स्ट पुलिस मुख्यालय से आर टी आई के माध्यम से मांगेगा जिससे स्पष्ट जवाब मिल सके।

निष्पक्ष जांच और जवाबदेही जरूरी

पुलिस का काम आम नागरिकों की सुरक्षा करना और शिकायतों पर कानून के मुताबिक कार्रवाई करना है। ऐसे में जब किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ बार-बार अलग-अलग समय पर शिकायतें या न्यायालयीन कार्यवाही सामने आती हैं, तो संबंधित मामलों की स्थिति स्पष्ट करना पुलिस विभाग की संस्थागत जिम्मेदारी बनती है।

यह भी उतना ही जरूरी है कि किसी अधिकारी को केवल आरोपों के आधार पर दोषी न माना जाए। प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता और संबंधित पुलिस अधिकारी, दोनों का पक्ष निष्पक्ष जांच में सामने आना चाहिए।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय 2018, 2022 और 2026 से जुड़े मामलों का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक कर इन सवालों का जवाब देगा?

देहरादून की जनता को जवाब चाहिए और पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता भी।

 

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

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