देहरादून
डीवीपीजी कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव में युवा छात्र नेता नीलांश ने शानदार जीत दर्ज कर अपनी मजबूत छात्र पकड़ का परिचय दिया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े कार्यकर्ता रहे निलांश को जब संगठन की ओर से टिकट नहीं मिला, तो उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में महासचिव पद पर चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया। चुनाव परिणाम सामने आते ही नीलांश ने जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक और छात्र नेतृत्व क्षमता का दम दिखा दिया।
नीलांश की जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने बिना किसी संगठन के आधिकारिक टिकट के छात्रों के बीच जाकर अपने मुद्दे और अपनी कार्यशैली के आधार पर समर्थन मांगा। चुनाव परिणाम में छात्रों ने उनके पक्ष में अपना भरोसा जताते हुए उन्हें महासचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी।
छात्र राजनीति में लंबे समय से सक्रिय नीलांश छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं। कॉलेज में छात्रों की समस्याओं को लेकर आवाज उठाने से लेकर उनके अधिकारों और सुविधाओं के लिए संघर्ष करने तक, नीलांश की सक्रियता छात्र समुदाय के बीच चर्चा का विषय रही है।
नीलांश की जीत को एक ऐसे युवा की जीत के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिसने संगठन के टिकट के बजाय सीधे छात्रों के बीच जाकर अपनी स्वीकार्यता साबित करने का प्रयास किया। चुनाव परिणाम ने यह भी दिखाया कि छात्र नेतृत्व में व्यक्तिगत सक्रियता, छात्रों के साथ जुड़ाव और मुद्दों पर आवाज उठाने की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
जीत के बाद नीलांश ने छात्र हितों को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी छात्रों ने सौंपी है, उसे पूरी ईमानदारी और मजबूती के साथ निभाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने छात्रों के विश्वास के लिए आभार जताते हुए कहा कि यह जीत केवल उनकी नहीं, बल्कि उन सभी छात्रों की है जिन्होंने उन पर भरोसा जताया।
डीवीपीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में नीलांश की यह जीत अब छात्र राजनीति में एक नए युवा नेतृत्व के उभरने के तौर पर चर्चा में है।



