
जन शिकायतों के त्वरित और स्थायी समाधान को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को आयोजित समाधान दिवस में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों से लगातार अधिक शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, उनकी जीआईएस मैपिंग कर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। इसके लिए एनआईसी को पिछले 10 समाधान दिवसों के आंकड़ों का विभागवार विश्लेषण कर शिकायत-बहुल क्षेत्रों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं।

समाधान दिवस में डीएम ने 146 फरियादियों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। भूमि विवाद, अतिक्रमण, सीमांकन, बैंक ऋण, बिजली, पेयजल तथा आर्थिक सहायता से जुड़ी शिकायतें प्रमुख रूप से सामने आईं।
डीएम ने सभी उप जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को समाधान दिवस में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने अथवा वर्चुअल माध्यम से जुड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने चकराता और कालसी जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाली शिकायतों के प्राथमिकता से निस्तारण पर जोर दिया।

बैंकों से संबंधित शिकायतों पर डीएम ने लीड बैंक प्रबंधक को समीक्षा करने के निर्देश दिए। वहीं पारिवारिक विवादों और महिला उत्पीड़न के मामलों में ‘वन स्टॉप सेंटर’ के माध्यम से पीड़ित महिलाओं को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने और केंद्र का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा।
समाधान दिवस में कई महत्वपूर्ण मामलों पर जिलाधिकारी ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। चकराता के ग्राम नाड़ा में सड़क कटिंग के बाद सुरक्षा कार्य न होने, त्रिवेणी घाट स्थित धर्मशाला भूमि पर अवैध कब्जे, सालावाला केंद्रीय विद्यालय के बाहर अतिक्रमण और अवैध गतिविधियों, सहसपुर में भूमाफियाओं की शिकायतों तथा छरबा में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
डीएम ने स्पष्ट किया कि शिकायतों को लंबित रखना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा और जन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
समाधान दिवस में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।



