उत्तराखंड

शिक्षक को उर्गम भेजने के फैसले के खिलाफ ग्रामीणों का आंदोलन, स्कूल में धरना शुरू

Listen to this article

चमोली। ज्योतिर्मठ के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कलगोठ में लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षक को व्यवस्था के तहत अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज उर्गम भेजे जाने का ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि कक्षा छह से आठवीं तक की पढ़ाई पिछले चार वर्षों से एक ही शिक्षक के भरोसे चल रही थी। अब उस शिक्षक को भी हटाए जाने से जूनियर हाईस्कूल स्तर पर शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो गई है। विरोध में अभिभावकों और ग्रामीणों ने 23 सितंबर से विद्यालय परिसर में धरना और क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है।

कलगोठ के ग्राम प्रधान सहदेव सिंह रावत ने बताया कि सहायक अध्यापक विज्ञान बिरजू राम पटेल करीब 26 वर्षों से कलगोठ विद्यालय में सेवाएं दे रहे थे। पिछले चार वर्षों से वह कक्षा छह से आठवीं तक के बच्चों को विज्ञान के साथ अन्य विषय भी पढ़ा रहे थे। ग्रामीणों के अनुसार, सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षक ने बच्चों की पढ़ाई को पूरी मेहनत और लगन से संभाला। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक की सेवानिवृत्ति में करीब डेढ़ वर्ष ही शेष है। ऐसे में उन्हें अचानक व्यवस्था के तहत उर्गम भेजे जाने से अभिभावकों में नाराजगी है।

ग्रामीणों के मुताबिक, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कलगोठ में करीब 40 बच्चे अध्ययनरत हैं। उनका कहना है कि जूनियर हाईस्कूल स्तर पर बच्चों को पढ़ाने वाले एकमात्र शिक्षक को भी हटा दिए जाने से उनकी पढ़ाई प्रभावित होगी। ग्रामीण शिक्षक बिरजू राम पटेल को तत्काल कलगोठ वापस बुलाने और विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं।

वहीं, शिक्षा विभाग का कहना है कि शिक्षक का स्थानांतरण नहीं हुआ है, बल्कि उन्हें फिलहाल व्यवस्था के तहत उर्गम भेजा गया है। जिला शिक्षाधिकारी बेसिक चमोली पंकज उप्रेती ने बताया कि कलगोठ जूनियर हाईस्कूल वर्ष 2015 में उच्चीकृत होकर हाईस्कूल बन चुका है। उर्गम विद्यालय में चार शिक्षकों का स्थानांतरण हुआ है और वहां शिक्षण व्यवस्था बनाए रखने के लिए कलगोठ से शिक्षक को व्यवस्था के तहत भेजा गया है। उन्होंने बताया कि कलगोठ विद्यालय में वर्तमान में हाईस्कूल स्तर के चार शिक्षक तैनात हैं और पठन-पाठन निरंतर चल रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि हाईस्कूल में शिक्षक तैनात होने के बावजूद कक्षा छह से आठवीं के बच्चों की पढ़ाई के लिए वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षक को हटाना उचित नहीं है। उन्होंने शिक्षक को वापस कलगोठ विद्यालय भेजने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बच्चों की शिक्षण व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!