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देहरादून: अर्बन कोऑपरेटिव बैंक में किसानों के साथ 12 साल पुराना घोटाला, इंसाफ की मांग

Dehradun: 12-year-old scam with farmers in Urban Cooperative Bank, demand for fair investigation

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देहरादून मे राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के उत्तराखंड प्रभारी अरुण शर्मा ने अर्बन कोऑपरेटिव बैंक (UCB) पर गंभीर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

संगठन का दावा है कि 2012 से चल रहे इस घोटाले में बैंक ने आरटीओ, देहरादून पुलिस और कोतवाली देहरादून के विशेष सहयोग से किसानों को ठगा।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ऑडिट ग्रुप की कथित साझेदारी के बावजूद यह मामला 2022 तक सामने नहीं आया। एक उदाहरण के तौर पर, एक ICB कंपनी की मशीन को 1 करोड़ रुपये में बेचा दिखाया गया, जबकि इसकी असली कीमत मात्र 20-25 लाख थी। किसान संगठन के पास इन आरोपों के पुख्ता सबूत मौजूद हैं।

संगठन ने पत्रकारों को जारी बयान में निम्नलिखित बिंदुओं का जिक्र किया:2022 में डीएम का हस्तक्षेप: डीएम देहरादून ने बैंक को लिखित फटकार लगाई और सभी रिकवरी आदेश निरस्त कर दिए, लेकिन बैंक ने इसका पालन नहीं किया।

बैंक सचिव रविंद्र बंसल का वादा: मृत्यु से पहले 2022 में पटेल नगर थाने में बुलाए गए बंसल ने किसानों को NOC देने का वादा किया। कुछ किसानों को JCB लोन के विपरीत NOC जारी की गई, जिसके गवाह मौजूद हैं।

अधिकारियों की चालाकी: बैंक अधिकारियों ने JCB लोनधारकों को ‘आंतरिक बैंक मामला’ बताकर चुप करा दिया।वर्तमान सचिव की संलिप्तता: बीरबल, जो रविंद्र बंसल के साथ कई सालों से कार्यरत हैं, इस घोटाले में पूरी तरह लिप्त बताए जा रहे हैं।SMS सेवा बंद: 2017-18 से बैंक ने SMS अलर्ट बंद कर दिए, जबकि बंसल जी जिंदा थे—क्या बैंक ‘सो’ रहा था?

घोटाले की जड़ें: यह धोखाधड़ी 2012-13 से चली आ रही है, जो RBI ऑडिट में भी नहीं पकड़ी गई।राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के उत्तराखंड और हिमाचल के प्रभारी अरुण शर्मा ने कहा कि पुलिस और प्रशासनिक मिलीभगत के बावजूद सबूत सुरक्षित हैं, और वे उच्च स्तरीय जांच की मांग करते है यदि पीड़ितों को न्याय ना मिला तो 15 दिन बाद देहरादून स्तिथि आरबीआई कार्यालय का ताला बन्द किया जायेगा।

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

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