RailwayConnectivityBoost : ट्रेन से श्रीनगर पहुंचेंगे तीर्थयात्री, बिल्व केदार क्षेत्र बनेगा पड़ाव ;- श्रीनगर को आध्यात्मिक-आर्थिक पर्यटन जोन के रूप में नई पहचान मिलेगी। बिल्व केदार को इसका केंद्र चुना गया है, मुख्य कारण प्रस्तावित रेलवे स्टेशन और बेहतर कनेक्टिविटी है। यह क्षेत्र अब आध्यात्मिकता और अर्थव्यवस्था का संगम बनेगा। आध्यात्मिक आर्थिक पर्यटन जोन में शामिल होने से श्रीनगर को नई पहचान मिलने जा रही है।
ऋषि-मुनियों की यह तपोभूमि अब आध्यात्मिकता और अर्थव्यवस्था के संगम का केंद्र बनेगी। राज्य सरकार ने बिल्ब केदार को आध्यात्मिक-आर्थिक पर्यटन जोन का केंद्र चुना है, इसके पीछे कनेक्टिविटी सबसे खास वजह है। बिल्व केदार में जिस जगह को आध्यात्मिक-आर्थिक पर्यटन जोन के लिए चुना गया है, वह रेलवे स्टेशन के पास प्रस्तावित है।
राज्य सरकार का मानना है कि श्री नगर में रेल कनेक्टिविटी सुविधा शुरू होने के बाद पर्यटकों की आमद बढ़ेगी, इसलिए बिल्व केदार में आध्यात्मिक आर्थिक पर्यटन जोन बनाकर पर्यटकों के ठहराव के लिए विशेष प्रबंध किए जाएंगे।
इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा व राज्य की आर्थिकी मजबूत होगी।चारधाम यात्रा मार्ग पर स्थित श्रीनगर पहले से भी तीर्थयात्रियों का प्रमुख पड़ाव रहा है। यहां की धार्मिक विरासत, प्राकृतिक शांति और भौगोलिक स्थिति भी इसे आध्यात्मिक आर्थिक पर्यटन जोन के लिए उपयुक्त बनाती है।
केदारखंड की परंपराओं से जुड़ा बिल्व केदार क्षेत्र सदियों से शिव भक्ति का केंद्र रहा है, जहां की आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक विरासत इसे विशिष्ट पहचान देती है। आध्यात्मिक आर्थिक पर्यटन जोन के तहत बिल्व केदार के आसपास स्थित प्रमुख धार्मिक स्थलों को एकीकृत करते हुए एक पर्यटन क्षेत्र विकसित करने की योजना है।
इसमें कमलेश्वर महादेव मंदिर, धारी देवी मंदिर, देवलगढ़ व कालीमठ मंदिर जैसे आस्था केंद्रों को जोड़ा जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को एक समग्र तीर्थ अनुभव प्राप्त हो सके। इस परियोजना के माध्यम से श्री नगर में धर्म केवल आस्था का विषय नहीं रहेगा, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण का आधार भी बनेगा। श्रीनगर अब उस दिशा में बढ़ेगा, जहां मंदिरों की घंटियों के साथ विकास की नई ध्वनि भी सुनाई देगी।



