
देहरादून
उत्तराखंड को देशभर में “पर्यटन प्रदेश” के रूप में पहचान मिली हुई है। पहाड़ों की खूबसूरती, ठंडी वादियां, धार्मिक स्थल और प्राकृतिक पर्यटन के कारण हर साल लाखों पर्यटक उत्तराखंड पहुंचते हैं। राज्य की राजधानी देहरादून भी पर्यटन का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। मसूरी, ऋषिकेश, हरिद्वार और चारधाम यात्रा का मुख्य प्रवेश द्वार होने के कारण देहरादून में हर मौसम में पर्यटकों की भारी आवाजाही रहती है।
लेकिन इन सबके बीच एक बड़ा सवाल लगातार खड़ा हो रहा है कि आखिर पर्यटन राजधानी कहलाने वाला देहरादून रात 10 बजे के बाद इतना शांत और सुनसान क्यों हो जाता है? आखिर क्यों शहर की रौनक कुछ ही घंटों में गायब हो जाती है?
स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि पहले देहरादून देर रात तक जागने वाला शहर माना जाता था। राजपुर रोड, घंटाघर, चकराता रोड और कई बाजारों में देर रात तक चहल-पहल दिखाई देती थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। रात होते ही अधिकांश बाजार बंद हो जाते हैं और सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है।
व्यापारियों का मानना है कि बढ़ते किराए, महंगी दुकानों और लगातार बढ़ते खर्चों ने छोटे कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। वहीं दूसरी ओर पुलिस प्रशासन की सख्ती और देर रात तक चलने वाले कैफे, रेस्टोरेंट व दुकानों पर निगरानी का असर भी कारोबार पर पड़ रहा है। कई कैफे संचालकों का कहना है कि समय सीमा और लगातार कार्रवाई के डर से नाइट कल्चर विकसित नहीं हो पा रहा।
पर्यटन विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि देहरादून को वास्तव में आधुनिक पर्यटन राजधानी बनाना है तो यहां सुरक्षित और व्यवस्थित “नाइट टूरिज्म” को बढ़ावा देना होगा। देश के कई बड़े पर्यटन शहर देर रात तक जीवंत रहते हैं, जहां पर्यटक रात में भी घूमना, खरीदारी करना और स्थानीय संस्कृति का आनंद लेना पसंद करते हैं।
हालांकि सुरक्षा व्यवस्था भी एक बड़ा मुद्दा है। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सुरक्षा और पर्यटन के बीच संतुलन बनाकर देहरादून को फिर से जीवंत बनाया जा सकता है?
आज जरूरत इस बात की है कि राजधानी देहरादून सिर्फ दिन में ही नहीं बल्कि रात में भी पर्यटन गतिविधियों से गुलजार दिखे। क्योंकि एक पर्यटन शहर की पहचान सिर्फ उसकी खूबसूरती से नहीं, बल्कि उसकी जीवंतता और रौनक से भी होती है।
खासतौर पर बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटक इस स्थिति को लेकर अक्सर हैरानी जताते हैं। देर रात जब लोग अपने परिवार के साथ देहरादून पहुंचते हैं, तो शहर की ज्यादातर सड़कें सुनसान और अधिकांश रेस्टोरेंट, ढाबे व खाने-पीने की दुकानें बंद मिलती हैं।
कुछ पर्यटकों से बातचीत में सामने आया कि उन्हें रात में शहर में भोजन तक नहीं मिल पाता। पर्यटकों का कहना है कि कई बार वे लंबा सफर तय करके देहरादून पहुंचते हैं, लेकिन होटल में चेक-इन करने के बाद डिनर के लिए बाहर निकलते हैं तो लगभग सभी रेस्टोरेंट बंद मिलते हैं। इससे राजधानी की छवि पर भी असर पड़ता है, क्योंकि एक पर्यटन शहर से लोगों की अपेक्षा रहती है कि वहां देर रात तक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों।
प्रशासन द्वारा जो निर्धारित समय रेस्टोरेंट और खाने-पीने की दुकानों के लिए तय किया गया है, उससे पहले ही कई प्रतिष्ठान अपने शटर गिरा देते हैं। ऐसे में रात में आने वाले यात्रियों, पर्यटकों और दूसरे राज्यों से पहुंचने वाले लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। खासकर परिवार के साथ आने वाले लोगों के सामने बच्चों और बुजुर्गों के लिए भोजन की समस्या खड़ी हो जाती है।



