उत्तराखंड कांग्रेस की नई कमेटियों पर दानिश कुरैशी ने उठाए सवाल, मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर जताई नाराजगी

देहरादून: उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नई सूची जारी होने के बाद पार्टी के भीतर मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस के पूर्व महानगर अध्यक्ष दानिश कुरैशी ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी में मुस्लिम समाज को अपेक्षित हिस्सेदारी नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए नेतृत्व पर निशाना साधा है।
दानिश कुरैशी ने कमेटियों में शामिल सदस्यों का आंकड़ा साझा करते हुए दावा किया कि 226 पदों में केवल नौ मुस्लिम नेताओं को जगह मिली है। उन्होंने इसे करीब चार प्रतिशत प्रतिनिधित्व बताते हुए कहा कि जिन समुदायों से पार्टी को लगातार समर्थन मिलता रहा है, उन्हें संगठन में पर्याप्त भागीदारी नहीं दी गई।
कई प्रमुख कमेटियों में मुस्लिम प्रतिनिधित्व शून्य होने का दावा
कुरैशी के अनुसार, 41 सदस्यीय एग्जीक्यूटिव कमेटी में दो मुस्लिम नेताओं को जगह मिली है। वहीं पांच सदस्यीय मैनिफेस्टो कमेटी, पांच सदस्यीय डिसिप्लिनरी कमेटी, तीन सदस्यीय एसआईआर कमेटी और चार सदस्यीय चार्जशीट कमेटी में एक भी मुस्लिम सदस्य शामिल नहीं है।
उन्होंने कोषाध्यक्ष पद पर भी मुस्लिम प्रतिनिधित्व नहीं होने का दावा किया। इसके अलावा 24 प्रदेश उपाध्यक्षों में एक मुस्लिम, 36 प्रदेश महासचिवों में तीन मुस्लिम और 107 प्रदेश सचिवों में चार मुस्लिम नेताओं को शामिल किए जाने की बात कही।
‘संगठन में हिस्सेदारी के समय नजरअंदाज’
पूर्व महानगर अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि चुनाव और राजनीतिक गतिविधियों के दौरान मुस्लिम समाज से समर्थन और भागीदारी की अपेक्षा की जाती है, लेकिन संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर हिस्सेदारी देने के समय समुदाय को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व से सवाल करते हुए कहा कि यदि पार्टी को सरकार बनाने का लक्ष्य हासिल करना है तो संगठन में सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देना होगा। उन्होंने नेतृत्व से समय रहते इस स्थिति पर पुनर्विचार करने की अपील की।
आंकड़ों के आधार पर नेतृत्व पर सवाल
दानिश कुरैशी ने अपने बयान में विभिन्न कमेटियों और पदों पर मुस्लिम नेताओं की संख्या का आंकड़ा सार्वजनिक करते हुए कहा कि संगठन में प्रतिनिधित्व और राजनीतिक समर्थन के बीच संतुलन होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से मुस्लिम समाज की राजनीतिक और संगठनात्मक भागीदारी को लेकर गंभीरता से विचार करने की मांग की है।
हालांकि, उनके द्वारा बताए गए आंकड़े उनके बयान और उपलब्ध सूची के आधार पर हैं। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।



