हरिद्वार में ठगों का अनोखा खेल, खुद को रेलवे कर्मचारी का रिश्तेदार बताकर मजदूरों को लूटा

हरिद्वार: हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर जनरल टिकट को एसी कोच के टिकट में बदलवाने का झांसा देकर मजदूरों से ठगी करने वाले पांच आरोपियों को जीआरपी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को रेलवे कर्मचारियों का रिश्तेदार बताकर यात्रियों का भरोसा जीतते थे। इसके बाद सामान और नकदी जमा करने के बहाने उनके मोबाइल फोन और बैंक खातों तक पहुंच बनाकर रुपये निकाल लेते थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 25 हजार रुपये नकद, पीड़ितों का मोबाइल फोन और बैग बरामद किया है। वहीं, बैंक खातों से निकाली गई रकम में से 49,999 रुपये फ्रीज कराए गए हैं।
एसपी जीआरपी अरुणा भारती ने प्रेस वार्ता में बताया कि गिरफ्तार पांचों आरोपी बिहार के रहने वाले हैं और उनकी उम्र 19 से 24 वर्ष के बीच है। आरोपियों ने हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर पश्चिम बंगाल के दो मजदूरों को निशाना बनाया था। सीओ अनुज के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मैन्युअल पुलिसिंग, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र की मदद से घटना के करीब 30 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पांचों आरोपी रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया से पकड़े गए।
दशहरा और दीपावली पर घर जाने की तैयारी कर रहे थे मजदूर
पुलिस के मुताबिक, 10 अक्टूबर की रात पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के निवासी बिस्वजीत सौरेन और रंजीत कोरा हरिद्वार रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। दोनों करीब एक साल से हरिद्वार में दिहाड़ी मजदूरी कर रहे थे। दशहरा और दीपावली पर अपने घर जाने के लिए उन्होंने कुंभ एक्सप्रेस से आसनसोल जाने के जनरल टिकट खरीदे थे। दोनों अपने बच्चों के साथ त्योहार मनाने के लिए कई महीनों से मेहनत-मजदूरी कर पैसे जोड़ रहे थे।
ट्रेन का इंतजार करते समय दोनों की मुलाकात दो युवकों से हुई। आरोपियों ने बातचीत के दौरान खुद को बिहार जाने वाला बताया और कहा कि उनके मामा रेलवे में टीटी हैं। वे जनरल टिकट को एसी थर्ड कोच के टिकट में बदलवा सकते हैं। आरोपियों ने बिहारी भाषा में बातचीत कर मजदूरों का भरोसा जीता और उन्हें अपने एक अन्य साथी से मिलवाया, जो टीटी की तरह बात कर रहा था।
सामान जमा कराने का झांसा देकर हासिल किया मोबाइल का पिन
आरोपियों ने रेलवे के नियमों का हवाला देते हुए मजदूरों से कहा कि एसी कोच में सफर करने से पहले यात्रियों को अपना सामान, नकदी और मोबाइल जमा करना पड़ता है। इसके बदले रसीद दी जाती है और गंतव्य पर सामान वापस कर दिया जाता है। उनकी बातों में आकर दोनों मजदूरों ने करीब 12 हजार रुपये नकद, मोबाइल फोन, बैग और कपड़े आरोपियों को सौंप दिए।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने मजदूरों को सामान की रसीद मिलने का इंतजार करने के लिए एक स्थान पर बैठा दिया और फिर वहां से फरार हो गए। अगले दिन बैंक खातों की जानकारी लेने पर मजदूरों को पता चला कि उनके खातों से कुल 90,500 रुपये निकाल लिए गए हैं। ठगी का पता चलने पर दोनों ने जीआरपी हरिद्वार पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
पांच आरोपी मिलकर करते थे ठगी
जीआरपी के मुताबिक, आरोपी योजनाबद्ध तरीके से वारदात को अंजाम देते थे। गिरोह के दो सदस्य रेलवे स्टेशन पर सीधे-सादे यात्रियों की तलाश कर उनसे दोस्ताना बातचीत शुरू करते थे। इसके बाद तीसरे साथी को रेलवे कर्मचारी का रिश्तेदार बताकर सामने लाया जाता था। वह टीटी की तरह बात करता और अन्य साथी एसी कोच में सफर करने के नियमों का हवाला देकर यात्रियों को सामान व नकदी जमा कराने के लिए तैयार करते थे।
पुलिस के अनुसार, आरोपी यात्रियों को विश्वास में लेकर उनके मोबाइल फोन और सामान पर कब्जा कर लेते थे। इसके बाद मोबाइल का पिन कोड हासिल कर बैंक खातों से रकम निकालकर फरार हो जाते थे। त्योहारों के दौरान रेलवे स्टेशनों पर बढ़ने वाली भीड़ का फायदा उठाकर वे यात्रियों को निशाना बनाते थे।
बिहार भागने की फिराक में थे आरोपी
पीड़ितों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के हुलिए, कपड़ों और बातचीत के तरीके की जांच की। सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र की मदद से पांचों की पहचान की गई। पुलिस के मुताबिक, आरोपी बिहार जाने वाली ट्रेन से फरार होने की फिराक में थे, तभी उन्हें रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया से गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सौरभ, सुमित कुमार, किशन कुमार, जितेंद्र कुमार चौधरी और बंटी कुमार के रूप में हुई है। सभी बिहार के मुंगेर और भागलपुर जिलों के अलग-अलग गांवों के निवासी हैं। पुलिस ने उनके कब्जे से 25 हजार रुपये नकद, वनप्लस मोबाइल फोन और पीड़ितों का बैग बरामद किया है। इसके अलावा बैंक से 49,999 रुपये का लेनदेन फ्रीज कराया गया है।
महंगे शौक पूरे करने के लिए करते थे ठगी
एसपी जीआरपी अरुणा भारती के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने महंगे मोबाइल फोन, बाइक और कपड़े खरीदने के लिए कम समय में अधिक पैसा कमाने की चाह में ठगी करने की बात सामने आई है। इनमें कुछ आरोपी मजदूरी करने, ऑटो चलाने, सब्जी बेचने और राजमिस्त्री का काम करते थे।
एसपी जीआरपी ने बताया कि गरीब मजदूरों की मेहनत की कमाई ठगने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। फ्रीज कराई गई रकम दीपावली से पहले पीड़ितों के खातों में वापस कराने का प्रयास किया जा रहा है। पांचों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर दिया गया है और उनके आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही, त्योहारों के दौरान रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सुरक्षा और सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।



