अग्निवीर योजना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़: गणेश गोदियाल, कांग्रेस ने सरकार से पूछे कई सवाल

देहरादून: कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने संयुक्त रूप से पत्रकार वार्ता की। इस दौरान नेताओं ने अग्निवीर योजना को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए और इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बताया।
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि अग्निवीर योजना स्थायी रोजगार के अवसरों को सीमित करने वाली व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि देश के लाखों युवा सेना में स्थायी नौकरी की उम्मीद लेकर भर्ती की तैयारी करते हैं, लेकिन अग्निवीर व्यवस्था में अधिकांश युवाओं का सैन्य करियर चार वर्ष बाद समाप्त हो जाता है।
गोदियाल ने कहा कि युवा 17-18 वर्ष की उम्र में सेना में प्रवेश करता है और चार वर्ष बाद करीब 21-22 वर्ष की उम्र में उसे दोबारा रोजगार की तलाश करनी पड़ सकती है। कांग्रेस का सवाल है कि इतने कम समय में युवा अपने परिवार और भविष्य को किस तरह सुरक्षित करेगा। उन्होंने स्थायी सैनिकों और अग्निवीरों की सेवा अवधि, वेतन, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा में अंतर को लेकर भी सवाल उठाए।
प्रीतम सिंह ने कहा कि अग्निवीर योजना का उत्तराखंड के युवाओं पर विशेष प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सैन्य परंपरा गौरवशाली रही है और राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों के हजारों परिवार पीढ़ियों से सेना में रोजगार को आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा का आधार मानते आए हैं।
उन्होंने कहा कि युवाओं को ‘पक्की नौकरी’ चाहिए, चार साल का इंतजार नहीं। उनके मुताबिक बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं की कठिनाई के बीच युवा वर्षों तक तैयारी करते हैं और चार वर्ष की सेवा के बाद दोबारा रोजगार की दौड़ में लौटना उनके लिए चुनौती बन सकता है।
प्रीतम सिंह ने पेंशन और सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि लंबे समय तक देश की सेवा करने वाले सैनिकों और चार वर्ष बाद सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों के लिए पर्याप्त एवं दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा की क्या व्यवस्था है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि नियमित सेवा में सीमित संख्या में चयन के बाद शेष युवाओं के लिए रोजगार का स्थायी रोडमैप क्या है।
डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि केवल अलग-अलग विभागों में आरक्षण अथवा प्राथमिकता की घोषणा पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सरकार से अग्निवीरों को सेवा के बाद उपलब्ध कराए गए रोजगार और नियुक्तियों के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सैन्य बहुल राज्य है और यहां सेना से लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। उनके मुताबिक सेना की भर्ती को रोजगार के आंकड़े सुधारने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
पत्रकार वार्ता में सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल राम रतन नेगी ने दावा किया कि पहले हर साल करीब 80 हजार युवाओं को रोजगार मिलता था, जो अब घटकर करीब 47 हजार रह गया है। उन्होंने कहा कि यदि 25 प्रतिशत युवाओं को ही आगे स्थायी रूप से शामिल किया जाता है तो करीब 12 हजार युवा प्रति वर्ष स्थायी नौकरी पा रहे हैं। उन्होंने इस संबंध में 2023 के सरकारी आंकड़ों का हवाला दिया।
कांग्रेस नेताओं ने सरकार से सवाल किया कि चार वर्ष बाद सेवा से बाहर होने वाले युवाओं के लिए उच्च शिक्षा, सरकारी नौकरी, तकनीकी प्रशिक्षण, स्वरोजगार और बैंक ऋण के क्षेत्र में क्या ठोस सुविधाएं दी जा रही हैं। साथ ही यह भी पूछा गया कि अब तक कितने अग्निवीरों को चार वर्ष की सेवा के बाद स्थायी सरकारी रोजगार मिला है और सेना में नियमित भर्ती के रिक्त पद कब तक भरे जाएंगे।
कांग्रेस ने उत्तराखंड के लिए विशेष भर्ती नीति की मांग करते हुए कहा कि सैन्य बहुल राज्य के युवाओं के लिए सेना में नियमित भर्ती के पर्याप्त अवसर सुनिश्चित किए जाने चाहिए। इसके अलावा सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों के लिए विशेष पुनर्वास पैकेज की मांग भी रखी गई।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि उत्तराखंड के कितने युवाओं ने अग्निवीर योजना के तहत भर्ती पाई और उनमें से कितनों को आगे स्थायी सेवा मिली। उन्होंने अग्निवीर योजना की स्वतंत्र समीक्षा और भविष्य में अग्निवीरों को नियमित सैनिकों के समान सम्मानजनक सेवा-सुरक्षा देने पर भी सरकार का रुख स्पष्ट करने की मांग की।
पत्रकार वार्ता में पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, महिला प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह समेत अन्य कांग्रेस पदाधिकारी मौजूद रहे।



