मॉनसून आते ही कॉर्बेट में बढ़ी चौकसी, 600 किमी क्षेत्र में रोजाना पेट्रोलिंग

रामनगर: विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में मॉनसून सीजन की शुरुआत के साथ ही वन्यजीवों की सुरक्षा और जंगलों की निगरानी को लेकर व्यापक स्तर पर अभियान शुरू कर दिया गया है। वन्यजीव अपराधों पर रोक लगाने और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए कॉर्बेट प्रशासन ने मॉनसून गश्त को और अधिक सशक्त बनाया है। वर्तमान में कॉर्बेट की छह रेंजों में प्रतिदिन 600 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में गश्त की जा रही है, जबकि कालागढ़ टाइगर रिजर्व की छह रेंजों में भी लगातार निगरानी अभियान चलाया जा रहा है।
50 से 100 वनकर्मी हर रेंज में तैनात
कॉर्बेट प्रशासन के अनुसार प्रत्येक रेंज में करीब 50 से 100 वनकर्मी तैनात हैं, जो अलग-अलग टीमों में विभाजित होकर जंगल के संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त कर रहे हैं। एक रेंज में प्रतिदिन औसतन 100 से 120 किलोमीटर क्षेत्र कवर किया जा रहा है। इस प्रकार छह रेंजों को मिलाकर रोजाना 600 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में निगरानी की जा रही है।
हाथियों और पैदल गश्त का सहारा
मॉनसून के दौरान घने जंगल, ऊंची घास और दुर्गम रास्ते वन्यजीव तस्करों के लिए अवसर बन सकते हैं। इसी को देखते हुए वन विभाग ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया है। वनकर्मी पैदल गश्त के साथ-साथ हाथियों की मदद से उन क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं, जहां वाहन नहीं पहुंच सकते।
ड्रोन और सैटेलाइट से रखी जा रही नजर
कॉर्बेट प्रशासन आधुनिक तकनीक का भी भरपूर उपयोग कर रहा है। ड्रोन कैमरों के जरिए जंगल के बड़े हिस्से की निगरानी की जा रही है। इसके अलावा सैटेलाइट आधारित मॉनिटरिंग और आधुनिक संचार प्रणाली के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई के लिए विशेष टीमें तैयार रखी गई हैं।
मॉनसून में बंद रहते हैं कई पर्यटन जोन
बरसात के मौसम में सड़कें क्षतिग्रस्त होने, नालों में जलस्तर बढ़ने और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कॉर्बेट के कई पर्यटन जोन अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। पर्यटन गतिविधियां सीमित होने के बाद वन विभाग का पूरा ध्यान जंगलों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण पर केंद्रित हो जाता है।
वन्यजीवों के लिए अहम होता है मॉनसून
विशेषज्ञों के अनुसार मॉनसून का समय वन्यजीवों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान जंगलों में प्राकृतिक जल स्रोत सक्रिय हो जाते हैं, वनस्पतियों की वृद्धि होती है और कई वन्यजीवों का प्रजनन काल भी शुरू होता है। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना वन विभाग की प्राथमिकता बन जाती है।
जैव विविधता की सुरक्षा पर विशेष फोकस
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख बाघ संरक्षण क्षेत्रों में शामिल है। यहां बाघ, हाथी, तेंदुआ, भालू, घड़ियाल समेत सैकड़ों पक्षी प्रजातियां निवास करती हैं। वन विभाग का कहना है कि मॉनसून सीजन के दौरान ड्रोन, हाथी, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और पैदल गश्त के समन्वय से जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।
> “मॉनसून गश्त पूरे सीजन के दौरान जारी रहेगी। जंगल के प्रत्येक संवेदनशील क्षेत्र पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि वन्यजीवों और जैव विविधता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।”
— डॉ. साकेत बडोला, निदेशक, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व



