
उत्तराखंड में हीट वेव का खतरा बढ़ते ही स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के निर्देश पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने राज्यभर के जिलों को विशेष एडवाइजरी जारी करते हुए हीट स्ट्रोक और गर्मी से होने वाली बीमारियों से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा है।
भारतीय मौसम विभाग द्वारा इस बार सामान्य से अधिक तापमान की संभावना जताए जाने के बाद सरकार ने समय रहते एक्शन प्लान लागू कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि हीट-सम्बंधित बीमारियों से होने वाली मौतों को रोकना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अस्पतालों में विशेष हीटस्ट्रोक कक्ष बनाए जा रहे हैं, जहां कूलिंग सिस्टम, आइस पैक, ठंडे IV फ्लूइड और पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। “पहले ठंडा करें, फिर परिवहन करें” प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही ORS, इलेक्ट्रोलाइट्स और जरूरी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने 1 मार्च 2026 से हीट वेव से जुड़े मामलों की रोजाना मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी है। सभी जिलों को IHIP पोर्टल पर डेटा अपलोड करना होगा और संदिग्ध मौतों की जांच व ऑडिट भी किया जाएगा।
एडवाइजरी में बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बाहरी कार्य करने वाले श्रमिकों को सबसे अधिक संवेदनशील वर्ग माना गया है। लोगों को दोपहर 12 से 3 बजे तक धूप से बचने, हल्के सूती कपड़े पहनने और लगातार पानी पीने की सलाह दी गई है।
सार्वजनिक आयोजनों और खेल गतिविधियों के लिए भी नई गाइडलाइन जारी की गई है। बड़े आयोजनों में मेडिकल टीम, ORS और आइस बॉक्स की व्यवस्था अनिवार्य होगी। वहीं बढ़ती गर्मी को देखते हुए अस्पतालों में फायर सेफ्टी सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर और विद्युत लोड ऑडिट पर भी विशेष जोर दिया गया है।
स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने कहा कि राज्य सरकार पूरी गंभीरता के साथ हीट वेव की चुनौती से निपटने में जुटी है और सभी जिलों को अलर्ट पर रखा गया है। वहीं NHM मिशन निदेशक मनुज गोयल ने बताया कि राज्यभर में माइक्रो-लेवल प्लानिंग के तहत स्वास्थ्य इकाइयों को तैयार रखा गया है और रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है।



