
देहरादून
राजधानी के जिला चिकित्सालय कॉरोनेशन अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों को छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए भटकना पड़ रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठकर व्यवस्था संचालन का दावा कर रहे हैं।
अस्पताल परिसर में चर्चा है कि जनसंपर्क अधिकारी (PRO) और प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (CMS) अपने कार्यालयों में बैठकर व्यवस्थाओं का संचालन तो कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर मरीजों की समस्याओं के समाधान में अपेक्षित रुचि दिखाई नहीं दे रही। पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जरूरतमंद मरीजों के उपचार, जांच या अन्य स्वास्थ्य संबंधी मामलों को लेकर किए जाने वाले अनुरोधों को भी कई बार गंभीरता से नहीं लिया जाता।
निःशुल्क जांच और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने पहुंचे मरीजों को भी कई बार अनावश्यक औपचारिकताओं और कागजी प्रक्रिया में उलझाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। सवाल यह है कि जब अस्पताल जनता की सेवा के लिए है तो जरूरतमंद मरीज को राहत देने के बजाय उसे इधर-उधर क्यों भटकाया जा रहा है।
अब जरूरत इस बात की है कि केवल एसी कमरों में बैठकर आदेश देने से काम नहीं चलेगा। अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी और प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उन्हें नियमित रूप से मरीजों की समस्याएं सुननी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी अस्पताल में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानजनक और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं मिलें।
मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग को राजधानी के इस महत्वपूर्ण अस्पताल की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए, ताकि सरकारी अस्पतालों में जनता का भरोसा और मजबूत हो सके।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सीएम धामी एवं स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल लगातार सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और जनसुविधाओं की बात कर रहे है, तब जमीनी स्तर पर मरीजों को राहत क्यों नहीं मिल पा रही?



