
देहरादून के डांडा लाखौंड स्थित एटीएस कॉलोनी में अवैध तरीके से मिलाया जा रहा आम और लीची का बगीचा खसरा नंबर133 में चल रही अजय सिंह व सैन्यधाम के आर्किटेक्ट डीके सिंह द्वारा षड्यंत्र कर प्लॉटिंग पर शुक्रवार को हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरे क्षेत्र को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान पूरे जिले का पुलिस बल , प्रशासनिक अधिकारी और वन विभाग की टीम मौके पर मौजूद रही, जिससे कॉलोनी के लोगों में काफी हड़कंप बना रहा।

मामला पिछले कई दिनों से चर्चा में था, जहां कुछ लोगों द्वारा बगीचे में अवैध रूप से पेड़ कटान और प्लॉटिंग किए जाने के आरोप लगाए जा रहे थे। हाईकोर्ट द्वारा मामले का संज्ञान लेने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और मौके पर पहुंचकर पूरी भुमि को सील कर दिया।
सूत्रों के अनुसार इस पूरे विवाद में एटीएस कॉलोनी आरडब्ल्यूए अध्यक्ष अजय सिंह और सैन्यधाम से जुड़े आर्किटेक्ट डी.के. सिंह की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिल्डर पुनीत अग्रवाल को जानबूझकर विवाद का मुख्य चेहरा बनाकर पेश किया जा रहा है, जबकि पूरे प्रकरण में कई अन्य पक्षों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

वहीं बिल्डर पुनीत अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने हर कार्य नियमानुसार और संबंधित विभागों की जानकारी में किया है। उनका दावा है कि कुछ लोगों द्वारा निजी द्वेष और स्थानीय राजनीति के चलते उन्हें बेवजह बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए तो पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी।

स्थानीय सूत्रों और क्षेत्र के कई लोगों का कहना है कि पुनीत अग्रवाल लंबे समय से देहरादून में निर्माण कार्यों से जुड़े रहे हैं और उनकी छवि एक व्यवस्थित और नियमों के तहत काम करने वाले कारोबारी की रही है। लोगों का आरोप है कि निजी स्वार्थ और आपसी खींचतान के चलते उन्हें इस विवाद में “विलेन” की तरह पेश करने की कोशिश की गई, जबकि वास्तविक फैसले और गतिविधियां कई अन्य लोगों की सहमति और सहभागिता से आगे बढ़ रही थीं।
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष अजय सिंह द्वारा प्लॉटिंग करने की दी गई कॉलोनीवासियों की
N.O.C भी जांच के घेरे में आ गई है। सूत्रों के अनुसार, हाईकोर्ट ने जिस एनओसी के माध्यम से नक्शा स्वीकृत हुआ है, उस N.O.C की गहनता से जांच करने का आदेश भी दिया है हाईकोर्ट के आदेशानुसार बनाई गई एसआईटी टीम इस विषय की तह तक जाने की कोशिश कर रही है।

वन विभाग की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ पेड़ों के कटान की अनुमति ली गई थी, लेकिन लकड़ी निकासी और अन्य गतिविधियों को लेकर विभाग अब विस्तृत जांच कर रहा है। वन विभाग ने संकेत दिए हैं कि यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित लोगों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन का कहना है कि फिलहाल हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए पूरे क्षेत्र को सील कर दिया गया है और मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।



