नार्को टेस्ट से पहले उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी पर विवाद, हरिद्वार पुलिस ने दी सफाई

हरिद्वार। बहुचर्चित अंकिता भंडारी प्रकरण में अभिनेत्री उर्मिला सनावर नार्को टेस्ट कराने के लिए तैयार हो गई हैं। हालांकि, अदालत में उनकी औपचारिक सहमति दिया जाना अभी बाकी है। उन्हें आगामी 3 नवंबर को कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस बीच, उनकी गिरफ्तारी को लेकर उठ रहे सवालों पर हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नवनीत सिंह भुल्लर ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी नार्को टेस्ट से बचाने के लिए नहीं, बल्कि रानीपुर कोतवाली में दर्ज मुकदमे के तहत की गई है।
एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के अनुसार, उर्मिला सनावर के खिलाफ दर्ज मुकदमे में गंभीर धाराएं हैं, जिसके चलते पुलिस ने गिरफ्तारी की कार्रवाई की। न्यायालय ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा है। उन्होंने नार्को टेस्ट से बचाने के लिए गिरफ्तारी किए जाने की चर्चाओं को अफवाह बताया।
कोर्ट के आदेश के बाद नार्को टेस्ट की प्रक्रिया
एसएसपी ने बताया कि नार्को टेस्ट के लिए संबंधित व्यक्ति की लिखित सहमति और न्यायालय का आदेश आवश्यक है। कोर्ट का आदेश मिलने पर उर्मिला सनावर को महिला पुलिसकर्मियों के साथ नार्को टेस्ट के लिए भेजा जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की जांच दूसरी एजेंसी कर रही है और वह स्वतंत्र रूप से अपना काम कर रही है।
25 अक्टूबर को सहारनपुर से हुई थी गिरफ्तारी
गौरतलब है कि 25 अक्टूबर को रानीपुर कोतवाली पुलिस ने उर्मिला सनावर को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया था। पूर्व विधायक सुरेश राठौर की बेटी की तहरीर के आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उर्मिला सनावर ब्लैकमेल कर रही थीं और रविदास धाम अपने नाम करने के साथ पांच करोड़ रुपये की मांग कर रही थीं।
शिकायत के मुताबिक, मांग पूरी नहीं होने पर जान से मारने और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक फोटो-वीडियो अपलोड करने की धमकी भी दी गई थी। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की है।
गिरफ्तारी पर कांग्रेस ने उठाए थे सवाल
उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस ने सवाल उठाए थे। अब हरिद्वार पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तारी का नार्को टेस्ट से बचाने से कोई संबंध नहीं है। फिलहाल उर्मिला सनावर न्यायिक हिरासत में हैं और नार्को टेस्ट को लेकर आगे की प्रक्रिया अदालत में उनकी औपचारिक सहमति और न्यायालय के आदेश पर निर्भर करेगी।



