देहरादून। उत्तराखंड में समान काम के लिए समान वेतन के दायरे में आ रहे उपनल कर्मचारियों के लिए अनुबंध की नई शर्तें तय कर दी गई हैं। कार्मिक विभाग ने पुराने अनुबंध पत्र को निरस्त करते हुए संशोधित ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसे औपचारिक परामर्श के लिए वित्त विभाग को भेज दिया गया है।
कार्मिक सचिव शैलेश बगौली ने बताया कि नया अनुबंध पत्र जल्द अंतिम रूप देकर जारी करने की प्रक्रिया चल रही है, ताकि उपनल कर्मचारी अपने-अपने विभागों में अनुबंध प्रक्रिया पूरी कर सकें और समान वेतन का लाभ प्राप्त कर सकें।
सूत्रों के अनुसार, नए अनुबंध में उपनल कर्मचारियों की अधिकांश मांगों को शामिल किया गया है। जिन प्रावधानों पर आपत्ति थी, उन्हें हटा दिया गया है, जिससे कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
नए अनुबंध में उपनल की अकुशल, अर्द्धकुशल, कुशल, उच्च कुशल और अधिकारी श्रेणी व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। अब कर्मचारी जिस पद पर कार्यरत होंगे, उन्हें उसी विभाग के स्थायी पद के समान माना जाएगा।
इसके अलावा, कर्मचारियों के खिलाफ अब विभाग एकतरफा कार्रवाई नहीं कर सकेंगे। किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई से पहले कर्मचारी को अपील का अधिकार मिलेगा और सक्षम अधिकारी के स्तर पर सुनवाई के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।
उपनल कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद गोदियाल ने सरकार से मांग की है कि संशोधित अनुबंध पत्र जल्द जारी किया जाए, क्योंकि देरी के कारण कर्मचारी अपने विभागों में प्रक्रिया शुरू नहीं कर पा रहे हैं और उनमें निराशा बढ़ रही है।
इधर यूपीसीएल में भी उपनल कर्मचारियों को समान वेतन देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके लिए स्क्रीनिंग समिति गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता चीफ-सिविल आशीष अरोड़ा कर रहे हैं। समिति में डीजीएम (वित्त) अमित कंसल, एसई (मुख्यालय) प्रदीप पंत और वरिष्ठ विधि अधिकारी महेंद्र कुमार सदस्य हैं, जबकि वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी राजेश भौरे को सह-संयोजक बनाया गया है।
यह समिति एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट अधिशासी निदेशक (मानव संसाधन) को सौंपेगी, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।



