उत्तराखंड

चमोली में मूसलाधार बारिश से तबाही, नारायणबगड़ बाजार में घुसा मलबा, हाईवे बाधित

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चमोली: मानसून की दस्तक से पहले ही चमोली जिले में भारी बारिश ने तबाही मचा दी। गुरुवार देर रात विकासखंड नारायणबगड़ के मुख्य बाजार में अतिवृष्टि के चलते पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर आ गए। मलबा बाजार, दुकानों और सड़क तक पहुंच गया, जिससे कई दुकानों में नुकसान हुआ और सड़क किनारे खड़े वाहन भी इसकी चपेट में आ गए। मलबा आने से राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित हो गया, जिसके चलते यातायात प्रभावित रहा।

 

बारिश का असर राजकीय इंटर कॉलेज नारायणबगड़ पर भी देखने को मिला, जहां विद्यालय परिसर में भारी मात्रा में मलबा घुस गया। स्थानीय लोगों और व्यापारियों को पूरी रात परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलते ही प्रशासन और सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीमें मौके पर पहुंचीं और हाईवे से मलबा हटाकर यातायात बहाल करने के साथ-साथ स्कूल और प्रभावित दुकानों के आसपास सफाई अभियान शुरू किया।

 

क्षेत्रीय विधायक ने बताया कि प्रभावित व्यापारियों और स्थानीय लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है और पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।

 

हर मानसून में बनती है ऐसी स्थिति

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले 8 से 10 वर्षों से हर बरसात में इसी स्थान पर भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर गिरते हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि इसी क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी स्थित है, लेकिन अब तक स्थायी सुरक्षा कार्य नहीं किए गए हैं। लोगों ने ढलान उपचार और सुरक्षा दीवारों के निर्माण की मांग उठाई है।

 

पहले भी झेल चुका है आपदा की मार

 

चमोली जिला पहले से ही प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। पिछले वर्ष थराली और चेपड़ों क्षेत्र में आई आपदा में कई दुकानें मलबे में दब गई थीं और लोगों की आजीविका प्रभावित हुई थी। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मानसून के दौरान थराली क्षेत्र में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की स्थायी तैनाती की जाए, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

 

फिलहाल प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है और राष्ट्रीय राजमार्ग को पूरी तरह सुचारु करने का कार्य जारी है। हालांकि मानसून शुरू होने से पहले हुई इस घटना ने पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की तैयारियों और स्थायी सुरक्षा उपायों पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

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