देहरादून-मसूरी रोड की कमजोर होती हालत, कुठालगेट में फिर धंसी सड़क

देहरादून: बारिश के बीच देहरादून-मसूरी मार्ग पर सड़क धंसने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार दोपहर कुठालगेट के पास सड़क का एक किनारा करीब 10 मीटर लंबाई में धंस गया। सड़क धंसने की सूचना मिलते ही लोक निर्माण विभाग के अभियंता मौके पर पहुंचे और प्रभावित हिस्से का निरीक्षण कर स्थिति का आकलन शुरू किया।
फिलहाल मार्ग पर यातायात सुचारु रूप से चल रहा है, लेकिन सड़क के अन्य हिस्से के भी प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए विभाग की ओर से लगातार निगरानी की जा रही है।
लगातार सामने आ रही सड़क की कमजोर कड़ियां
कुठालगेट पर सड़क धंसने की घटना ऐसे समय हुई है, जब देहरादून-मसूरी मार्ग पर बारिश के कारण पहले से ही कई जगह खतरा बना हुआ है। इससे पहले 20 जुलाई 2026 को कोल्हूखेत के पास पानीवाला बैंड क्षेत्र में सड़क का एक हिस्सा धंस गया था। सड़क पर बड़ी दरारें आने के बाद प्रशासन ने एहतियातन मार्ग को बंद कर दिया था।
अगले दिन हल्के वाहनों के लिए यातायात खोला गया, लेकिन क्षतिग्रस्त हिस्से के कारण वाहनों की आवाजाही एकतरफा होने से जाम की स्थिति बनी रही।
पानीवाला बैंड पर फिर आया था मलबा
इसके बाद 22 जुलाई को पानीवाला बैंड के पास पहाड़ी से भारी मलबा और पेड़ सड़क पर आ गिरे थे। सुबह करीब 6:30 बजे हुई इस घटना के बाद मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। लोक निर्माण विभाग ने दो जेसीबी की मदद से करीब डेढ़ से दो घंटे में मलबा हटाकर यातायात बहाल कराया था।
पिछले साल भी भूस्खलन से प्रभावित हुआ था मार्ग
पानीवाला बैंड क्षेत्र पहले भी बारिश के दौरान खतरे के संकेत दे चुका है। 15 सितंबर 2025 को मूसलाधार बारिश के दौरान यहां भूस्खलन हुआ था, जिसके कारण कई वाहन फंस गए थे।
सितंबर 2025 की भारी बारिश में देहरादून-मसूरी मार्ग के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा था। भूस्खलन और लगातार बारिश के कारण मसूरी से देहरादून आने-जाने वाली प्रमुख सड़कों पर भी यातायात प्रभावित हुआ था।
संवेदनशील हिस्सों की तकनीकी जांच जरूरी
कुठालगेट पर सामने आया नया धंसाव इस महत्वपूर्ण मार्ग की लगातार कमजोर होती स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा रहा है। एक ओर पानीवाला बैंड और कोल्हूखेत में सड़क धंसने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, वहीं पहाड़ी से मलबा और पेड़ गिरने की घटनाएं भी हो रही हैं।
ऐसे में मार्ग के अन्य संवेदनशील हिस्सों की तकनीकी जांच और बारिश के दौरान उनकी लगातार निगरानी जरूरी हो जाती है। फिलहाल लोक निर्माण विभाग की टीम कुठालगेट पर धंसे हिस्से की स्थिति का आकलन कर रही है। अब यह देखना होगा कि सड़क धंसने की तकनीकी वजह क्या सामने आती है और प्रभावित हिस्से को सुरक्षित करने के लिए विभाग की ओर से क्या स्थायी उपाय किए जाते हैं।



