उत्तराखंड

उत्तराखंड इनोवेशन एंड सॉल्यूशंस हैकाथॉन 2026 का शुभारंभ, मंत्री प्रदीप बत्रा ने वास्तविक चुनौतियों के लिए AI समाधान विकसित करने का किया आह्वान

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देहरादून: उत्तराखंड इनोवेशन एंड सॉल्यूशंस हैकाथॉन 2026 (UKIS Hackathon 2026) का मंगलवार को के.पी. जोशी ऑडिटोरियम, ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी (GEHU), देहरादून में शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह सुबह 10 बजे शुरू हुआ, जिसमें युवा नवप्रवर्तकों, विद्यार्थियों, तकनीकी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, उद्योग प्रतिनिधियों और सरकारी हितधारकों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के आईटी एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (ITDA), उत्तराखंड सरकार के निदेशक समेत सरकार, तकनीकी क्षेत्र, शिक्षा और नवाचार से जुड़े विभिन्न प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

Axolotl Emprise LLP द्वारा ITDA, उत्तराखंड सरकार के सहयोग से आयोजित UKIS Hackathon 2026 90 दिवसीय राज्यव्यापी नवाचार कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य उत्तराखंड की वास्तविक चुनौतियों को विद्यार्थियों, डेवलपर्स, नवप्रवर्तकों, कार्यरत पेशेवरों और तकनीकी समाधान विकसित करने वाले विशेषज्ञों से जोड़ना है। कार्यक्रम के तहत देहरादून, रुड़की और रुद्रपुर में ऑनलाइन और ऑन-ग्राउंड गतिविधियों के माध्यम से 1,000 से अधिक प्रतिभागियों को जोड़ने की योजना है।

युवा प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि तकनीक का विकास केवल इसलिए नहीं होना चाहिए कि वह नई या रोमांचक है, बल्कि इसलिए होना चाहिए क्योंकि वह लोगों के सामने मौजूद वास्तविक समस्याओं का समाधान कर सकती है। उन्होंने उत्तराखंड की विशिष्ट चुनौतियों से निपटने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की संभावनाओं पर जोर दिया।

उन्होंने यातायात और भीड़ प्रबंधन, आपदा पूर्व तैयारी, पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की निगरानी और नागरिकों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच जैसी चुनौतियों के समाधान में AI के उपयोग की संभावनाएं बताईं। साथ ही जिम्मेदार AI के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि AI को इंजीनियरों, योजनाकारों और प्रशासकों की सहायता करनी चाहिए, न कि उनके निर्णय लेने की क्षमता का स्थान लेना चाहिए।

मंत्री ने प्रतिभागियों से ऐसे समाधान विकसित करने का आह्वान किया, जिनका व्यावहारिक उपयोग जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन दल, वन विभाग, यातायात पुलिस और आम नागरिक कर सकें। उन्होंने कहा कि हैकाथॉन के दौरान विकसित प्रोटोटाइप आगे चलकर उत्पाद, स्टार्टअप और रोजगार के अवसरों का आधार बन सकते हैं।

UKIS Hackathon 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, गवटेक, नागरिक नवाचार और उभरती तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके प्रमुख क्षेत्रों में सार्वजनिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, भू-स्थानिक इंटेलिजेंस, कंप्यूटर विजन, ड्रोन एनालिटिक्स, बुनियादी ढांचे की निगरानी तथा वानिकी एवं पर्यावरण संबंधी चुनौतियां शामिल हैं।

कार्यक्रम में AI आधारित सरकारी नॉलेज सिस्टम, AI-सहायित DPR और RFP तैयार करने, डेटा गवर्नेंस, ड्रोन आधारित आपदा आकलन, वन एवं वन्यजीव निगरानी, GIS आधारित योजना निर्माण, प्रेडिक्टिव ट्रैफिक इंटेलिजेंस और नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवाओं जैसे संभावित अनुप्रयोगों पर भी चर्चा की गई।

हैकाथॉन में प्रतिभागी वास्तविक समस्याओं पर आधारित प्रॉब्लम स्टेटमेंट्स पर काम करेंगे। इस दौरान वे तकनीकी समाधान विकसित करने के साथ विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे और मूल्यांकन व शॉर्टलिस्टिंग की प्रक्रिया से गुजरेंगे। संभावनाशील विचारों को आगे विकसित करने के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

कार्यक्रम प्रतिभागियों को समस्या की पहचान और विचार-विकास से लेकर उत्पाद विकास, पायलट प्रोजेक्ट, कार्यान्वयन, इनक्यूबेशन और फंडिंग तक संभावित अवसरों की दिशा में आगे बढ़ने का मंच प्रदान करेगा। इसके अलावा उद्योग से जुड़ने, नेटवर्किंग, पोर्टफोलियो निर्माण, इंटर्नशिप और रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हो सकते हैं।

मंत्री ने प्रतिभागियों से केवल पुरस्कार के लिए प्रतिस्पर्धा करने के बजाय ऐसे समाधान विकसित करने का आह्वान किया, जो सुरक्षित, स्मार्ट और हरित उत्तराखंड के निर्माण में योगदान दे सकें। उन्होंने कहा कि किसी भी तकनीक की सफलता का अंतिम पैमाना यह होना चाहिए कि वह नागरिकों के जीवन को वास्तव में कितना आसान बनाती है।

उद्घाटन के साथ ही 90 दिवसीय राज्यव्यापी नवाचार यात्रा की शुरुआत हुई। इसका मार्गदर्शक सिद्धांत है—“उत्तराखंड के लिए बनाएं। इकोसिस्टम के साथ बनाएं। हैकाथॉन से आगे बनाएं।”

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

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