
देहरादून
एक ओर शिक्षा, रोजगार और बेरोज़गारी की त्रासदी से जूझता समाज, दूसरी ओर केवल वाहन के नंबर को सामाजिक हैसियत का पैमाना मानने वाली सोच। आरटीओ देहरादून द्वारा जारी ताज़ा फैंसी वाहन नंबर नीलामी सूची ने समाज की इसी विडंबनापूर्ण तस्वीर को उजागर कर दिया है।

इस नीलामी में लोगों और कंपनियों ने यह साबित कर दिया कि आज मेहनत नहीं, नंबर बोलता है। कुछ नंबरों के लिए चुकाई गई रकम ने आम आदमी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अब पहचान डिग्री, योग्यता और श्रम से नहीं, बल्कि नंबर प्लेट से तय होगी।
नीलामी में सबसे अधिक चर्चा का विषय बना UK07HK0001 नंबर, जिसे पद्मनाभ हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड ने 9 लाख 26 हजार रुपये की भारी भरकम राशि देकर हासिल किया। इसके बाद UK07HK0006 नंबर अमित सचदेवा ने 3 लाख 65 हजार रुपये, UK07HK0005 नंबर शमशेर सिंह ने 2 लाख 12 हजार रुपये, UK07HK0002 नंबर दीपक चौहान ने 1 लाख 37 हजार रुपये और UK07HK0003 नंबर मयूर कुमार ने 1 लाख 27 हजार रुपये में लिया।
इसी क्रम में UK07HK0009 नंबर इटरनल एडिफाइस को 1 लाख 57 हजार रुपये, UK07HK0007 नंबर हरजिंदर सिंह को 1 लाख 16 हजार रुपये तथा UK07HK1111 नंबर सिद्धार्थ अठवाल को 88 हजार रुपये में आवंटित किया गया।
“शुभ” और “स्टेटस” माने जाने वाले नंबर भी पीछे नहीं रहे। UK07HK7777 नंबर विदुषी निशांक, UK07HK3333 नंबर मयंक अग्रवाल, UK07HK4444 नंबर सनी मलिक और UK07HK9999 नंबर तारिणी सोल्यूशन ने 26-26 हजार रुपये में हासिल किए।
अन्य नंबरों में UK07HJ0066 राज कुमार पुरी (11 हजार), UK07HK0004 एस.एस. इंफ्रास्ट्रक्चर (25 हजार), UK07HK0008 राहुल सोनकर (26 हजार), UK07HK0011 मार्गराइट वुडटेक्स प्राइवेट लिमिटेड (11 हजार), UK07HK0055 अनंत वर्मा (10 हजार), UK07HK0077 अनमोल मट्टा (45 हजार), UK07HK0100 कोर वैल्यू टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (30 हजार), UK07HK0777 विनोद कुमार (37 हजार), UK07HK0999 शिल्पा राणा (11 हजार), UK07HK7000 नीरज गोयल (13 हजार) और UK07HK9000 निपुण शारदा (46 हजार रुपये) में आवंटित हुए।
कटाक्ष: बेरोज़गारी बनाम दिखावे की दुनिया
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीलामी समाज में बढ़ती आर्थिक असमानता और दिखावे की मानसिकता को उजागर करती है। एक ओर युवा नौकरी के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं दूसरी ओर केवल दूसरों को प्रभावित करने के लिए नंबरों पर लाखों खर्च किए जा रहे हैं।
RTO देहरादून की भूमिका सराहनीय
सामाजिक बहस के बीच यह भी उल्लेखनीय है कि आरटीओ देहरादून के अधिकारी डॉ. संदीप सैनी के नेतृत्व में यह नीलामी पूर्णतः पारदर्शी और नियमबद्ध ढंग से सम्पन्न हुई। उनके प्रयासों से सरकार को लाखों रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ, जो परिवहन सुधार, सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक सुविधाओं में उपयोग किया जाएगा। डॉ. सैनी द्वारा लगातार राजस्व बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को प्रशासनिक स्तर पर सराहा जा रहा है।
अंतिम सवाल
क्या समाज अब इंसान को उसके कर्म से नहीं, बल्कि उसके वाहन नंबर से आँकेगा?
क्या बेरोज़गारी के दौर में यह दिखावा हमारी प्राथमिकताओं पर सवाल नहीं उठाता?



