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डॉ. प्रतिमा सिंह का तीखा प्रहार: ‘संकल्प विहीन, दिशा विहीन बजट सामाजिक न्याय के खिलाफ’

Dr. Pratima Singh's scathing attack: 'Resolve-less, directionless budget is against social justice'

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उत्तराखंड विधानसभा में राज्यपाल अभिभाषण के ठीक दिन ही पेश किए गए बजट पर विपक्ष ने जमकर निशाना साधा। कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने इसे ‘संकल्प विहीन, दिशा विहीन और सामाजिक न्याय के विपरीत’ करार देते हुए सरकार की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक इतिहास में पहली बार इतनी जल्दबाजी में बजट पेश किया गया, जो नियमों का उल्लंघन है।

उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास में पहली बार सरकार राज्यपाल अभिभाषण के दिन ही सदन में बजट पेश किया गया इतनी जल्दी किस बात की थी नियम भी ये कहता है की राज्यपाल के अभिभाषण पर ही चार दिन चर्चा होनी चाहिए, फिर बजट पेश होना चाहिए था और उस पर दो दिन कम से कम चर्चा होनी चाहिए थी।

G- गरीब कल्याण

Y- युवा

A- अन्नदाता

N- नारी सशक्तीकरण

बजट की शुरुआत ज्ञान से करने से पहले प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का हाल भी देख ले सरकार सरकारी आकड़ा कह रहा है की उत्तराखंड में बाईस सौ स्कूल बंद क्यों हुए पिछले 9 सालों में, ड्राप आउट रेट बढ़ रहा है परंतु प्रति छात्र खर्च भी बढ़ा रही सरकार जिस राशि की हो रही बंदरबांट

1.11 करोड़ का बजट पेश किया पर ये भी तो बता दे की इस बजट का तीस प्रतिशत ब्याज और उधारी की किश्त के लिए चला जाएगा।

मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट के लिए तीस करोड़ आवंटित किए है पर अब तक इस किट में जो घोटाला सामने आया था उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई किट में महज़ पाँच सौं का सामान भी नहीं होता

आज प्रदेश पलायन का दंश झेल रहा है सत्रह सौ से ज़्यादा गाँव भूतिया जिसे घोस्ट विलेज कहते हैं बन चुके हैं पहले अस्थाई पलायन यह भाजपा शासन काल में स्थाई पलायन बढ़ा है जिसकी वजह शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार की उचित व्यवस्था ना होना है पर सरकार का फोकस पलायन रोकने पर है ही नहीं

आयुष्मान योजना में छह सौ करोड़ का प्रावधान महज ऊँट के मुंह में जीरा जैसा है इससे ज़्यादा का तो अस्पतालों का बकाया है जिसकी वजह से अस्पताल अटल आयुष्मान योजना के तहत इलाज करने को मना कर रहे हैं।

धामी जी के हिसाब से इस प्रदेश में पहली बार मंदिरों का सौंदर्यीकरण हो रहा है मतलब आज तक देवभूमि के मंदिरों को धामी का इंतज़ार था इस तरह की बातें बता रही हैं की धामी जी भी उन लोगों में शुमार हैं जिनके लाइट देश 2014 के बाद आज़ाद हुआ।

बजट से आम जानता को उम्मीद थी की जो महंगाई का बोझ उन पर है उसको लेकर कोई राहत मिलेगी, व्यापारियों को भी सरकार से सहायता की उम्मीद थी पर उन्हें भी निराशा ही हाथ लगी। सब कुछ वही पुराना सिर्फ आकड़े किए गए इधर से उधर। जंगली जानवर और मानव का संघर्ष एक ज्वलंत समस्या है पर इस पर कोई बात नहीं है बजट में। बजट सिर्फ जल्दबाजी में पेश किया गया है डर में पेश किया गया है की कहीं कुर्सी ना चली जाये और आख़िरी बजट पेश ना कर पाए धामी।

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

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