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ChronicpainDepression : क्या दर्द डिप्रेशन का कारण बन सकता है?

When the pain persists for a long time, some changes start occurring in this area.

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ChronicpainDepression :  क्या दर्द डिप्रेशन का कारण बन सकता है? :-क्या आप भी शरीर के किसी पुराने दर्द को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं? अगर हां, तो आपको अब सावधान होने की जरूरत है। हाल ही में सामने आए एक वैज्ञानिक अध्ययन से यह चौंकाने वाली बात पता चली है कि लंबे समय तक दर्द सहने से व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो सकता है।

दर्द का सीधा असर हमारे मस्तिष्क के कुछ खास हिस्सों पर पड़ता है, जो हमारी मानसिक स्थिति को बदल सकता है। जानकारी के अनुसार, हमारे दिमाग में ‘हिप्पोकैंपस’ नाम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जो याददाश्त का केंद्र है। हिप्पोकैंपस एक कंट्रोल रूम की तरह काम करता है, जो पुराने दर्द के प्रति हमारी भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करता है।

जब दर्द लंबे समय तक बना रहता है, तो इस हिस्से में कुछ ऐसे बदलाव होने लगते हैं जो व्यक्ति को डिप्रेशन की ओर धकेल सकते हैं। दर्द सहने वाले हर व्यक्ति को डिप्रेशन हो जाए, ऐसा बिल्कुल भी जरूरी नहीं है। यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि समय बीतने के साथ व्यक्ति का मस्तिष्क उस दर्द पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।

जो लोग लंबे समय से दर्द में तो थे लेकिन डिप्रेशन का शिकार नहीं हुए, उनके ‘हिप्पोकैंपस’ का वॉल्यूम थोड़ा बड़ा और उसकी सक्रियता बढ़ी हुई पाई गई। इसके बिल्कुल उलट, जो लोग दर्द के साथ-साथ डिप्रेशन से भी जूझ रहे थे, उनके हिप्पोकैंपस का आकार छोटा हो गया था, उसकी गतिविधियों में रुकावट आ गई थी और ऐसे लोगों की सोचने-समझने की क्षमता भी काफी खराब पाई गई।

लंबे समय के आंकड़ों का जब और बारीकी से विश्लेषण किया गया, तो यह बात सामने आई कि दिमाग में होने वाले ये नकारात्मक बदलाव अचानक नहीं आते हैं। ये परिवर्तन समय के साथ धीरे-धीरे विकसित होते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि पुराने दर्द को हल्के में लेने के बजाय समय रहते उस पर ध्यान दिया जाए।

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

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