
देहरादून
राजधानी के राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने एक बेहद दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण बीमारी का सफलतापूर्वक निदान कर एक युवक को नई उम्मीद दी है। 19 वर्षीय युवक में पल्मोनरी एल्वियोलर माइक्रोलिथियासिस (PAM) जैसी अत्यंत दुर्लभ फेफड़ों की बीमारी पाई गई है, जिसके अब तक दुनिया भर में केवल लगभग 1000–1100 मामले ही दर्ज किए गए हैं।
इस जटिल केस का खुलासा वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अनुराग अग्रवाल के मार्गदर्शन में हुई गहन जांच के दौरान हुआ। इस दौरान डॉ. अविशम, डॉ. कुमार प्रशांत, डॉ. मानवेंद्र गर्ग, डॉ. अनुप्रिया, डॉ. गुंजन और डॉ. नेहल की टीम ने भी अहम भूमिका निभाई।
डॉक्टरों के अनुसार, इस बीमारी में फेफड़ों की एल्वियोली (छोटी वायु थैलियों) में कैल्शियम के सूक्ष्म कण पत्थर जैसी संरचना बना लेते हैं, जो धीरे-धीरे सांस लेने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। इतनी कम उम्र में इस बीमारी का सामने आना न सिर्फ मेडिकल रूप से चुनौतीपूर्ण है, बल्कि परिवार के लिए भी भावनात्मक रूप से बेहद कठिन स्थिति है।
डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि,
“यह बीमारी इतनी दुर्लभ है कि अधिकतर डॉक्टरों को अपने पूरे करियर में भी एक केस देखने को नहीं मिलता। समय पर इसका निदान होना ही सबसे बड़ी राहत है।”
इस खबर ने युवक और उसके परिवार को जहां एक ओर झकझोर दिया, वहीं दून मेडिकल कॉलेज की टीम ने न सिर्फ इलाज बल्कि मानसिक और भावनात्मक सहयोग देकर परिवार को संभालने का काम भी किया।
आज यह युवक इलाज के साथ-साथ मजबूत हौसले के साथ जिंदगी की ओर देख रहा है। उसके चेहरे की मुस्कान और आत्मविश्वास एक ही संदेश दे रहे हैं—
“मैं लड़ूंगा… और जीतूंगा।”
यह केस न सिर्फ चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि यह भी साबित करता है कि देहरादून में अब जटिल और दुर्लभ बीमारियों के इलाज की आधुनिक सुविधाएं और विशेषज्ञता उपलब्ध है।



