
देहरादून
राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल दून अस्पताल के TB एवं चेस्ट वार्ड में मरीजों को इलाज के साथ-साथ भीषण गर्मी की मार भी झेलनी पड़ रही है। वार्ड में कई स्थानों पर पंखे और एसी की व्यवस्था न होने के कारण मरीजों का हाल बेहाल है। उमस और गर्मी से परेशान मरीजों और उनके तीमारदारों का गुस्सा अब अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर फूटने लगा है।

बताया जा रहा है कि गर्मी से परेशान मरीजों के परिजन लगातार डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ से शिकायत कर रहे हैं। स्थिति कई बार इतनी तनावपूर्ण हो जाती है कि तीमारदारों और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच तीखी बहस और नोकझोंक तक हो रही है। जबकि डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि वे इलाज कर रहे हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

इतना ही नहीं, ड्यूटी रूम, जहां पीजी (PG) डॉक्टर 24 घंटे की ड्यूटी के दौरान आराम करते हैं, उसकी स्थिति भी बेहद खराब बताई जा रही है। वहां भी गर्मी से राहत के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं, जिससे लगातार ड्यूटी करने वाले रेजिडेंट डॉक्टरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि एक ओर सरकार सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर राजधानी के सबसे महत्वपूर्ण अस्पताल में ही मरीजों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

अब सवाल यह है कि जब TB और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के मरीजों के लिए भी उचित तापमान और आरामदायक वातावरण उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, तो अस्पताल प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मरीजों और तीमारदारों ने मांग की है कि अस्पताल प्रशासन तत्काल वार्ड में पंखे और एसी की व्यवस्था दुरुस्त करे, ताकि मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों दोनों को राहत मिल सके।



