उत्तराखंड में फिर बिगड़ेगा मौसम, भारी बारिश का अलर्ट; संवेदनशील इलाकों में बढ़ाई गई निगरानी
मौसम अपडेट। उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। मौसम विभाग ने प्रदेश में 17 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है। देहरादून, बागेश्वर और नैनीताल में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं अन्य जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम को देखते हुए शुक्रवार को देहरादून, पिथौरागढ़ और नैनीताल में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है।
मौसम विभाग के निदेशक डॉ. सीएस तोमर के मुताबिक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। देहरादून, बागेश्वर और नैनीताल में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से मौसम की स्थिति पर नजर रखने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए पिथौरागढ़ और नैनीताल जिला प्रशासन ने शुक्रवार को कक्षा एक से 12वीं तक के सभी सरकारी, अर्द्धसरकारी और निजी विद्यालयों के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों में एक दिन का अवकाश घोषित किया है। खराब मौसम के बीच प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
बारिश के बीच उत्तराखंड में भू-धंसाव और भूस्खलन का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्टों के अनुसार प्रदेश में 461 से अधिक गांव अति-संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं। इन क्षेत्रों में जमीन में दरारें पड़ने और भू-धंसाव की घटनाएं सामने आती रही हैं।
पिथौरागढ़ के धारचूला और मुनस्यारी, उत्तरकाशी के भटवाड़ी और वरुणावत क्षेत्र तथा नैनीताल का बलियानाला क्षेत्र भी भू-धंसाव और भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील माना जा रहा है। वहीं इसरो के लैंडस्लाइड एटलस और आपदा प्रबंधन से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक रुद्रप्रयाग और चमोली में भी भूस्खलन का खतरा काफी अधिक है।
रुद्रप्रयाग की केदारनाथ घाटी, ऊखीमठ और गुप्तकाशी क्षेत्र के कई गांव भू-धंसाव की समस्या से प्रभावित हैं। चमोली में जोशीमठ के बाद थराली, पोखरी और पीपलकोटी क्षेत्र के कई गांव भी संवेदनशील स्थिति में हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक हिमालय की कमजोर भूगर्भीय संरचना, मेन सेंट्रल थ्रस्ट जैसी सक्रिय फॉल्ट लाइनों और लगातार बदलते मौसम के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और भू-धंसाव का खतरा बढ़ जाता है। कम समय में अत्यधिक बारिश होने से पहाड़ी ढलानों पर दबाव बढ़ता है, जिससे अचानक भूस्खलन और भू-धंसाव की घटनाएं हो सकती हैं।
इसके अलावा बिना वैज्ञानिक अध्ययन के निर्माण, पहाड़ी ढलानों पर बढ़ता निर्माण दबाव और पानी व सीवरेज की उचित निकासी नहीं होना भी जमीन के भीतर अस्थिरता बढ़ाने वाले कारणों में शामिल हैं। ऐसे में मौसम विभाग के अलर्ट के बीच प्रशासन के सामने संवेदनशील गांवों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाना बड़ी चुनौती है।



