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 UttarakhandNews : सदन में खुली स्वास्थ्य विभाग की सेहत रिपोर्ट, इलाज कम, आश्वासन ज्यादा

During the discussion in the House, Congress MLA Sumit Hridayesh launched a scathing attack on the functioning of the Health Department.

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 UttarakhandNews :  सदन में खुली स्वास्थ्य विभाग की सेहत रिपोर्ट, इलाज कम, आश्वासन ज्यादा :- उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत कैसी है, इसका आईना अब सड़क या अस्पतालों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि विधानसभा के भीतर भी साफ दिखाई देने लगा है। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में चल रही विधानसभा कार्यवाही के दौरान विधायकों ने जिस तरह से स्वास्थ्य विभाग की हकीकत उजागर की, उससे साफ है कि कागजों में मजबूत दिखाया जा रहा सिस्टम जमीन पर गंभीर बीमारियों से जूझ रहा है।

सदन में चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक Sumit Hridayesh ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य के अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी है और कई जगहों पर जरूरी उपकरण तक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में आम मरीजों को बेहतर इलाज मिलना मुश्किल होता जा रहा है। उनका आरोप था कि विभाग मरीजों को सुविधा देने से ज्यादा जांचों के नाम पर लोगों की जेब ढीली करवाने में लगा हुआ है, जिससे जनता परेशान है।

सदन में उठे इन सवालों ने स्वास्थ्य विभाग की उस तस्वीर को सामने ला दिया, जिसे अक्सर आंकड़ों और दावों के पर्दे के पीछे छिपा दिया जाता है। राज्य के कई अस्पतालों में डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं, जबकि जहां डॉक्टर हैं वहां संसाधनों की कमी अलग परेशानी खड़ी कर रही है। ऐसे में मरीजों को या तो निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है या फिर बड़े शहरों की ओर भागना पड़ता है।

हालांकि सरकार की ओर से जवाब देने पहुंचे संसदीय कार्य मंत्री Subodh Uniyal ने स्थिति सुधारने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि जल्द ही चिकित्सा चयन बोर्ड के माध्यम से 287 डॉक्टरों की भर्ती का परिणाम जारी किया जाएगा, जिससे अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी कुछ हद तक दूर हो सकेगी। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

लेकिन सवाल यही है कि जब हर साल यही आश्वासन दोहराए जाते हैं तो फिर अस्पतालों की हालत क्यों नहीं बदलती। चुनावी साल में स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा सदन के भीतर गूंजना इस बात का संकेत है कि समस्या अब इतनी गहरी हो चुकी है कि उसे नजरअंदाज करना आसान नहीं रहा।

विपक्ष के अन्य विधायकों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का मुद्दा उठाया और बताया कि कई अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं, जांच की सुविधाएं नहीं हैं और मरीजों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भी बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है।
कुल मिलाकर सदन की चर्चा ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावे जमीन पर कब दिखाई देंगे। फिलहाल हालात ऐसे हैं कि मरीज इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें वहां इलाज से ज्यादा आश्वासन ही मिलता है।

अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ भाषणों और घोषणाओं में ही बेहतर दिखाई देंगी, जबकि अस्पतालों में मरीजों की परेशानियां उसी तरह जारी रहेंगी।

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

Adil Rao

एडिटर इन चीफ

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