
देहरादून
रमज़ान के पाक महीने में रोज़ा रखना हर मुसलमान की ख्वाहिश होती है। लेकिन डायबिटीज़ (मधुमेह) के मरीजों के लिए यह फैसला सोच-समझकर लेना ज़रूरी है। दून अस्पताल के मेडिसिन विभाग के सीनियर रेज़िडेंट डॉ. मोहम्मद आमिर खान के मुताबिक, डायबिटीज़ के मरीज भी रोज़ा रख सकते हैं, बशर्ते कि वे नियमित शुगर मॉनिटरिंग करें और दवाओं में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार बदलाव करें।
डॉ. मोहम्मद आमिर खान के अनुसार, नियंत्रित टाइप-2 डायबिटीज़ वाले मरीज नियमित शुगर मॉनिटरिंग और डॉक्टर की सलाह से दवा समायोजन कर सुरक्षित रूप से रोज़ा रख सकते हैं।
रोज़े में हाइपोग्लाइसीमिया (शुगर कम), हाइपरग्लाइसीमिया (शुगर अधिक) और डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है। अनियंत्रित टाइप-1, बार-बार शुगर गिरने वाले, गंभीर किडनी रोगी, गर्भावस्था में डायबिटीज़ और अत्यधिक बुजुर्ग मरीजों को रोज़ा नहीं रखना चाहिए।
डॉ. खान ने बताया कि शुगर जांच करने से रोज़ा नहीं टूटता। इफ्तार और सहरी के बीच पर्याप्त पानी पिएं, तली-भुनी चीज़ों से बचें और संतुलित आहार लें। यदि शुगर 70 mg/dl से कम या 300 mg/dl से अधिक हो जाए, या चक्कर/कमज़ोरी महसूस हो तो तुरंत रोज़ा तोड़ दें।
किन लोगों को रोज़ा नहीं रखना चाहिए?
डॉ. खान के अनुसार निम्न मरीजों को रोज़ा रखने से बचना चाहिए—
अनियंत्रित टाइप-1 डायबिटीज़
बार-बार शुगर गिरने की समस्या
डीकेए (DKA) का इतिहास
गंभीर किडनी रोग
गर्भावस्था में डायबिटीज़
अत्यधिक बुजुर्ग जिनको कई अन्य बीमारियां हों
मेटफॉर्मिन, सिटाग्लिप्टिन जैसी दवाएं अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं, जबकि ग्लाइमिप्राइड और इंसुलिन की डोज डॉक्टर की सलाह से समायोजित करनी चाहिए।
खानपान और दवा में सावधानी
डॉ. खान बताते हैं कि शुगर जांच करने से रोज़ा नहीं टूटता। इफ्तार से सहरी के बीच पर्याप्त पानी पिएं। सहरी में ओट्स, मल्टीग्रेन रोटी, दाल और अंडा जैसे कॉम्प्लेक्स कार्ब्स व प्रोटीन लें, जबकि इफ्तार की शुरुआत 1–2 खजूर से करें और तली-भुनी चीजों से परहेज रखें।
डॉक्टर की सलाह सबसे जरूरी
डॉ. मोहम्मद आमिर खान का कहना है कि बिना चिकित्सकीय परामर्श के दवा न तो बंद करें और न ही खुद से डोज बढ़ाएं या घटाएं। यह जानकारी केवल जागरूकता के लिए है। सही योजना और निगरानी के साथ डायबिटीज़ के मरीज सुरक्षित रूप से रोज़ा रख सकते हैं।



