Breakingउत्तराखंडकुमाऊँक्राइमगढ़वालदेहरादून
Trending

ऑपरेशन प्रहार की पोल: खाने को भटकती जनता, 12 बजे तक ठेके आबाद—वाह पुलिस!

Operation Prahar Exposed: The Public Scrambles for Food, Yet Liquor Shops Thrive Until Midnight—Bravo, Police!

Listen to this article

देहरादून में इन दिनों पुलिस का “ऑपरेशन प्रहार” ज़ोरों पर है। राजधानी के रेस्टोरेंट, पब और बारो पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर प्रशासन ने अपनी सख्ती का संदेश तो दे दिया है, लेकिन इसी बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है — राजधानी के 90 प्रतिशत ठेके देर रात रेस्टुरेंट पब क्लब बंद होने के बाद तक  खुलेआम कैसे संचालित हो रहे है? जबकी वहाँ खाने तक की सुविधाएं नहीं है।

जहां एक तरफ छोटे-बड़े फॅमिली रेस्टोरेंट्स को टाइमिंग और नियमों के नाम पर सख्ती से बंद कराया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ ठेको का रात 12 बजे तक खुले रहना कई सवाल खड़े कर रहा है सिर्फ 12 बजे तक नहीं उसके बाद भी शेटर के नीचे से जो चाहो मिल ओवररेटिंग मे मिल जाता है।

आखिर किसका संरक्षण?
स्थानीय लोगों और व्यापारियों के बीच चर्चा तेज है कि जब पूरे शहर में नियमों की सख्ती लागू है, तो ठेको को आखिर किसका शेय मिली हुई है? क्या कानून सबके लिए बराबर नहीं है या फिर कहीं न कहीं चुनिंदा पेशो को ढील दी जा रही है?

दोहरा मापदंड या सिस्टम की मिलीभगत?
रेस्टोरेंट इंडस्ट्री पहले ही प्रशासनिक सख्ती से परेशान है। ऐसे में अगर कुछ जगहों पर नियमों की अनदेखी हो रही है, तो यह सीधा-सीधा डबल स्टैंडर्ड का मामला बनता है।

जवाबदेही जरूरी
अब सवाल सिर्फ  ठेको का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता का है। क्या राजधानी मे आने वाले लोग साढ़े दस बजे के बाद खाना ही नहीं खा पाएंगे ?

या जो नहीं भी पीते उन्हें भी ठेको के सहारे गुजारा करना पड़ेगा?

जिन ठिकानो को निशाना बनाया जा रहा है वहाँ बैठने से लेकर खाने तक की व्यवस्था क्या बाहर से आने वाले लोग परिजनों के साथ अब ठेको की कैंटीन मे बैठेंगे ?

क्या यही है ऑपरेशन प्रहार?

Faizan Khan Faizy Editorial Advisor

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!