उत्तराखंड में विकराल हुई जंगलों की आग, देहरादून ने चमोली को पीछे छोड़ा; सख्ती की तैयारी में वन विभाग

देहरादून: उत्तराखंड में जंगलों की आग लगातार विकराल रूप लेती जा रही है। पहाड़ी जिलों के साथ अब मैदानी इलाकों में भी वनाग्नि की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार देहरादून जिला जंगलों में आग लगने के मामलों में चमोली को पीछे छोड़ते हुए सबसे अधिक प्रभावित जिला बन गया है। दून जिले के चार वन प्रभागों में अब तक करीब 74 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं, जबकि चमोली जिले में 68 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग की चपेट में आया है।
प्रदेश में वनाग्नि का सीजन शुरू होने के बाद पिछले लगभग 100 दिनों में 460 से अधिक आग की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। इन घटनाओं में करीब 380 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। लगातार बढ़ रही घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने प्रदेशभर में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
आग बुझाने में सहयोग नहीं किया तो होगी कार्रवाई
वन विभाग अब जंगलों में आग लगाने और आग बुझाने में सहयोग न करने वालों के खिलाफ सख्ती की तैयारी कर रहा है। बदरीनाथ-केदारनाथ वन प्रभाग के डीएफओ एसके दुबे ने बताया कि वन क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोग, वन उपज लेने वाले, लकड़ी काटने की अनुमति प्राप्त व्यक्ति और मवेशी चराने वाले यदि आग बुझाने में सहयोग नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
संशोधित प्रावधानों के तहत दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक की जेल, दो हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों सजा का प्रावधान है। पहले इस अपराध में केवल एक माह की जेल या 200 रुपये जुर्माने का नियम था, जिसे वर्ष 2001 में संशोधित कर सख्त किया गया था।
देहरादून में सबसे ज्यादा नुकसान
वन विभाग के अनुसार सबसे अधिक नुकसान देहरादून जिले के कालसी डिवीजन में हुआ है, जहां करीब 37 हेक्टेयर जंगल जल गए। इसके अलावा दून डिवीजन में 7 हेक्टेयर, मसूरी क्षेत्र में 6 हेक्टेयर और चकराता डिवीजन में 24 हेक्टेयर जंगल आग से प्रभावित हुए हैं।
चमोली जिले के बद्रीनाथ वन प्रभाग में 47 हेक्टेयर और अलकनंदा सॉयल कंजर्वेशन वन प्रभाग में 21 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं। चमोली में जंगल की आग के कारण दो लोगों की मौत भी हो चुकी है।
इसके अलावा पौड़ी में 58.75 हेक्टेयर, रुद्रप्रयाग में 48.62 हेक्टेयर, टिहरी में 42.20 हेक्टेयर, पिथौरागढ़ में 35.75 हेक्टेयर, नैनीताल में 19.05 हेक्टेयर और चंपावत में 6.05 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। उत्तरकाशी, बागेश्वर और अल्मोड़ा जिलों में भी आग की कई घटनाएं सामने आई हैं।
चकराता में साढ़े सात हेक्टेयर जंगल जले
चकराता वन प्रभाग की देवघर रेंज में बुधवार रात तीन अलग-अलग स्थानों पर लगी आग को गुरुवार दोपहर तक काबू किया गया। इस दौरान करीब साढ़े सात हेक्टेयर जंगल जल गए, जबकि वन विभाग ने करीब 428 हेक्टेयर जंगलों को बचाने में सफलता हासिल की।
वनकर्मियों ने करीब 12 घंटे की लगातार मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। डीएफओ वैभव कुमार ने बताया कि आग पहले जरासू पानी क्षेत्र के सिविल जंगल में लगी थी, जो तेज हवाओं के कारण आरक्षित वन क्षेत्र तक फैल गई।
त्यूणी में आग से सेब के बागानों को नुकसान
त्यूणी क्षेत्र में भीषण गर्मी के चलते जंगलों में लगी आग ने किसानों के बाग-बगीचों को भारी नुकसान पहुंचाया है। आग की चपेट में आने से सैकड़ों सेब के पेड़ जल गए। वन विभाग, अग्निशमन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों ने देर रात तक मशक्कत कर आग पर काबू पाया।
देहरादून में आठ जगह लगी आग
राजधानी देहरादून में गुरुवार को आग लगने की आठ घटनाएं सामने आईं। सहस्रधारा रोड और प्रेमनगर क्षेत्र के जंगलों में आग लगी, जबकि मोतीनगर और बसंत विहार में ट्रांसफॉर्मर में आग लगने से अफरातफरी मच गई। रेसकोर्स स्थित एक फार्मेसी दुकान और गांधी पार्क की एक पिज्जा दुकान में भी आग लगने की घटनाएं हुईं। दमकल विभाग ने सभी जगहों पर समय रहते आग पर काबू पा लिया।
उत्तरकाशी और नौगांव के जंगल अब भी धधक रहे
उत्तरकाशी जिले के बाड़ाहाट रेंज और नौगांव ब्लॉक के जंगलों में आग लगातार धधक रही है। वरुणावत पर्वत क्षेत्र में लगी आग ने बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है। वहीं नौगांव के भाटिया क्षेत्र में भी पिछले तीन दिनों से जंगलों में आग लगी हुई है।
सीसीएफ वनाग्नि सुशांत पटनायक ने बताया कि बढ़ते तापमान, बारिश की कमी, सूखी वनस्पति और तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैल रही है। कई दुर्गम इलाकों में आग बुझाने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त टीमें तैनात कर दी हैं और स्थानीय लोगों से सहयोग की अपील की है।



